चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने स्वतंत्रता को न्यायपालिका की आत्मा और लोकवादी ताकतों के उदय को इसके लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को लोकवादी ताकतों के खिलाफ खड़ा होकर सांविधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। मंगलवार को रूस के सोची में शंघाई सहयोग संगठन में चीफ जस्टिसों के सम्मेलन में जस्टिस गोगोई ने कहा कि जजों की नियुक्ति राजनीतिक दबाव और प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सफर में कुछ चरणों में जब विधायिका और कार्यकारी इकाइयां लोकवाद के प्रभाव में संविधान के तहत अपने कर्तव्यों व लक्ष्यों से दूर हो जाती हैं तो न्यायपालिका को इन ताकतों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। कुछ आलोचकों को यह स्थिति आलोचना का मौका दे सकती है कि कैसे जज चुने हुए प्रतिनिधियों के फैसले को पलट सकते हैं, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि दुनियाभर में ऐसी स्थितियों में न्यायिक संस्थाओं ने भारी दबाव डाला है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि कुछ न्यायिक क्षेत्रों में भी न्यायपालिका ने लोकवादी ताकतों के खिलाफ घुटने टेके हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें न्यायपालिका संस्थान की स्वतंत्रता पर ऐसी ताकतों के हमलों का मुकाबला करने के लिए खुद को मजबूत करे।
जस्टिस गोगोई ने कहा कि स्वतंत्रता न्यायपालिका की आत्मा है। अगर वह जनता का भरोसा खो देगी तो जो वह फैसला देगी वह न्याय नहीं होगा। देश में शासन की राजनीतिक प्रणाली जो भी हो, लेकिन प्रत्येक देश में लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रणाली चाहते हैं।