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सीजेआई रमण बोले: वैकल्पिक विवाद समाधान में देश के कानूनी परिदृश्य को बदलने की क्षमता, बातचीत और मध्यस्थता को अनिवार्य बनाने को कहा 

Sat, 09 Apr 2022 09:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केवडिया (गुजरात)

सार

सीजेआई ने कहा, एडीआर की अवधारणा, लोक अदालतों, ग्राम न्यायालयों और मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से, लाखों लोगों को एक मंच प्रदान करके भारत के कानूनी परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है।
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सीजेआई - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने शनिवार को कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) की अवधारणा में लाखों लोगों को अपनी शिकायतों को निपटाने के लिए एक मंच प्रदान करके भारतीय कानूनी परिदृश्य को बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के पर्याप्त सहयोग से एडीआर भारत में सामाजिक न्याय के एक उपकरण के रूप में उभर सकता है।

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास आयोजित मध्यस्थता और सूचना प्रौद्योगिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में सीजेआई ने अदालतों से बातचीत और मध्यस्थता को अनिवार्य बनाने के लिए सक्रिय प्रयास करने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय वितरण तंत्र में लगे लोगों को नई तकनीकों की पूरी समझ होनी चाहिए, जिनमें प्रक्रिया को सरल बनाने की क्षमता है। 

सीजेआई ने कहा, एडीआर की अवधारणा, लोक अदालतों, ग्राम न्यायालयों और मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से, लाखों लोगों को एक मंच प्रदान करके भारत के कानूनी परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा, यह लंबित मामलों को कम कर सकता है, न्यायिक संसाधनों और समय की बचत कर सकता है और वादियों को विवाद समाधान प्रक्रिया और उसके परिणाम पर कुछ हद तक नियंत्रण की अनुमति देता है। 
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उन्होंने कहा कि यह सबसे अधिक सशक्त बनाने के तरीकों में से एक है क्योंकि इसमें हितधारकों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। सीजेआई ने यह भी कहा कि संघर्ष हमारे जीवन के अपरिहार्य पहलू हैं, उन्हें समझ के माध्यम से हल किया जा सकता है।

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