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Supreme Court Listing System: चीफ जस्टिस यूयू ललित ने कहा- नई व्यवस्था को लेकर सभी जजों में एक राय

Thu, 15 Sep 2022 09:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामलों को सूचीबद्ध करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल ने बुधवार को कहा था कि नई व्यवस्था से सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। इसी के बाद गुरुवार को चीफ जस्टिस की टिप्पणी सामने आई है। 
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CJI UU Lalit - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने मामलों को सूचीबद्ध करने की नई व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच मतभेद होने की खबरों से इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से गुरुवार को हुए सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ललित ने कहा कि जो कुछ कहा जा रहा है, वह गलत है। सभी जजों में एक राय है। मामलों को सूचीबद्ध करने से लेकर बाकी चीजों तक कई बातें कही गई हैं। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि हमने मामलों को सूचीबद्ध करने का नया तरीका शुरू किया है। स्वाभाविक तौर पर इसमें कुछ दिक्कतें आनी थीं, लेकिन जो कुछ खबरों में कहा गया है, वह सही नहीं है। 

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दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल ने बुधवार को कहा था कि मामलों को सूचीबद्ध करने की नई व्यवस्था से सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा। ऐसा इसलिए है क्योंकि भोजनावकाश के बाद होने वाले सत्र में कई मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध रहते हैं।

5200 मुकदमों का निपटारा किया गया: चीफ जस्टिस
चीफ जस्टिस ललित ने कहा कि मामलों को सूचीबद्ध करने की नई व्यवस्था 29 अगस्त को लागू हुई थी और इसके बाद 14 सितंबर तक नए 1135 मुकदमे दायर हुए, लेकिन 5200 मामलों का निपटारा कर दिया गया। यह सब सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों और वकीलों की कोशिशों की वजह से संभव हो पाया। कई मुकदमे लंबित थे और अर्थहीन होते जा रहे थे। इसी वजह से हमें उनका निपटारा करना था और नतीजा आपके सामने है। 
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चीफ जस्टिस ने कहा कि यह भी सही है कि इस बदलाव के बाद ऐसे कुछ उदाहरण सामने आए, जब मुकदमों को ऐन वक्त पर दायर किया गया। इससे जजों और वकीलों पर काम का अत्यधिक दबाव भी पड़ा लेकिन मैं अपने सभी न्यायाधीश भाई-बहनों का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुस्कुराहट के साथ मुकदमों को सुना। यही वजह है कि हम 5200 मुकदमों का निपटारा कर सके और लंबित मुकदमों की संख्या को चार हजार तक घटा सके। यह एक अच्छी शुरुआत है। 

सूचीबद्ध करने की व्यवस्था में क्या बदलाव किया गया?
पदभार ग्रहण करने के बाद चीफ जस्टिस ललित ने जो शुरुआती बदलाव किए, उनमें से एक महत्वपूर्ण बदलाव मुकदमों को सूचीबद्ध करने की व्यवस्था से जुड़ा था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को शीर्ष अदालत सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर एक बजे के बीच नियमित यानी पुराने मामलों पर सुनवाई कर रही है। वहीं, भोजनावकाश के बाद यानी दोपहर दो बजे से चार बजे के बीच नए या ऐसे मुकदमों पर सुनवाई कर रही है, जिनमें नोटिस जारी किए जा चुके हैं। 

पहले व्यवस्था कुछ इस तरह थी कि नए मामले पहले सुने जाते थे और दोपहर बाद नियमित सुनवाई होती थी। अब सोमवार और शुक्रवार को कुल 30 जज मुकदमों की सुनवाई करते हैं। इसके लिए दो-दो जजों की पीठ का ही गठन किया जाता है। हर पीठ औसतन 60 से ज्यादा मामलों की सुनवाई करती है, जिनमें नई जनहित याचिकाएं शामिल होती हैं।

वकील बनना सम्मान की बात थी: चीफ जस्टिस 
27 अगस्त को 49वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले चुके यूयू ललित ने यह भी कहा कि वकील बनना सम्मान की बात थी। आज मैं जो कुछ हूं, इस पेशे की वजह से हूं। मैं इस पेशे के अलावा कुछ और बनने के बारे में नहीं सोच सकता था। इस बार एसोसिएशन का सदस्य होना भी सम्मान की बात थी। सुप्रीम कोर्ट का जज बनना हमेशा से एक सपना था।

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