फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Justice Krishna Iyer: CJI गवई बोले- न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर मानवाधिकार के पैरोकार, फांसी के खिलाफ रूख यादगार

Mon, 07 Jul 2025 02:36 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीजेआई भूषण गवई ने जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का योद्धा बताया। गवई ने कहा कि अय्यर ने संविधान को बदलाव का माध्यम माना और मृत्युदंड का हमेशा ही विरोध किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनके फैसले आज भी न्यायपालिका को राह दिखाते हैं।

विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई ने रविवार को प्रसिद्ध न्यायविद् और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति वीआर कृष्णा अय्यर को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने न्यायमूर्ति अय्यर को मानवाधिकारों के प्रहरी, सामाजिक न्याय के योद्धा और नागरिक स्वतंत्रताओं के मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अय्यर का न्यायिक दृष्टिकोण आज भी उन्हें और उनके जैसे कई वकीलों व न्यायाधीशों को प्रेरित करता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति अय्यर ने संविधान को सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम माना। उनके फैसले करुणा, समानता और गहरी संवैधानिक समझ से प्रेरित होते थे।

मृत्युदंड के खिलाफ रहे अय्यर- सीजेआई गवई

विज्ञापन

सीजेआई गवई ने बताया कि न्यायमूर्ति अय्यर ने मृत्युदंड (फांसी की सजा) का हमेशा विरोध किया। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब एक निर्दोष व्यक्ति को फांसी देने की तैयारी हो रही थी। यह देखकर अय्यर बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने इसे असभ्य और बर्बर सजा बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान अय्यर ने कई मामलों में मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदला और इस सजा की सीमा को कम करने की दिशा में रास्ता दिखाया।

ये भी पढ़ें:- BJP: नड्डा बोले- अगला लक्ष्य केरल, तमिलनाडु और बंगाल; ओडिशा में आठ जुलाई को हो सकता भाजपा अध्यक्ष का चुनाव
विज्ञापन


निर्धनों और वंचितों की आवाज बने अय्यर
सीजेआई गवई ने कहा कि न्यायमूर्ति अय्यर ने हमेशा गरीबों और समाज के कमजोर तबकों के हक में काम किया। उन्होंने कहा कि अय्यर की न्यायिक सोच कोर्टरूम तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह आम जनता के संघर्षों से जुड़ी हुई थी। गवई ने कहा कि जब भी कोई अदालत तकनीकी अड़चनों से ऊपर उठकर न्याय करती है, जब भी कोई फैसला कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है, तब न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर की विरासत केवल सम्मानित ही नहीं होती, बल्कि जीवित रहती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Siddaramaiah Vs Shivakumar: क्या कर्नाटक का 'पद संघर्ष' जारी है? संत बोले- शिवकुमार ऊंचे पद के काबिल; डीके मौन

अय्यर के सात साल के कार्यकाल का किया जिक्र
इसके साथ ही अंत में मुख्य न्यायाधीश गवई ने बताया कि अय्यर का सात साल का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट में बहुत प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि अय्यर ने कई ऐसे फैसले दिए जिनसे गरीब और वंचित लोगों को राहत मिली, जिन्हें आमतौर पर तकनीकी वजहों से न्याय नहीं मिल पाता। सीजेआई गवई ने न्यायमूर्ति अय्यर के सिद्धांतों को अपने खुद के करियर में प्रेरणा बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी भारत की न्याय व्यवस्था की आत्मा में बसे हुए हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें