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CJI: सीजेआई चंद्रचूड़ ने की कानूनी पेशे में महिलाओं की सहभागिता की वकालत, कहा- समान अवसर पैदा करने होंगे

Sat, 25 Mar 2023 04:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै

सार

कानूनी पेशे में महिला-से-पुरुष अनुपात का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि कानूनी पेशे में आने के लिए तमिलनाडु में 50,000 पुरुष नामांकन के अनुपात में केवल 5,000 महिला नामांकन हैं।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : twitter
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर कानूनी पेशे में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की वकालत की है। शनिवार को मदुरै में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कानूनी पेशे में महिलाओं और पुरुषों के अनुपात को “निराशाजनक” बताया। इस दौरान महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाशाली महिला वकीलों की कोई कमी नहीं है। 

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वह यहां जिला अदालत परिसर में अतिरिक्त न्यायालय भवनों के शिलान्यास समारोह और जिला एवं सत्र न्यायालय और मयिलादुत्रयी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा महिला अधिवक्ताओं की भर्ती के बारे में चैंबर्स को संदेह है। इसका कारण युवा प्रतिभाशाली महिलाओं की कमी नहीं है। बल्कि यह हमारी रूढ़िवादिता का परिणाम है जो हम महिलाओं के प्रति रखते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले भर्ती कक्षों का मानना है कि महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण काम पर लंबे समय तक काम करने में असमर्थ होंगी। हम सभी को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि बच्चे पैदा करना और बच्चों की देखभाल करना एक विकल्प है और महिलाओं को यह ज़िम्मेदारी उठाने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

कानूनी पेशे में महिला-से-पुरुष अनुपात का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि कानूनी पेशे में आने के लिए तमिलनाडु में 50,000 पुरुष नामांकन के अनुपात में केवल 5,000 महिला नामांकन हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशा महिलाओं के लिए समान अवसर प्रदाता नहीं है। ये आंकड़े केवल तमिलनाडु में नहीं हैं, बल्कि ऐसे आंकड़े पूरे देश में समान हैं। 
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इस दौरान उन्होंने बदलती स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हालांकि ये माहौल बदल रहा है। जिला न्यायपालिका में हाल ही में हुई भर्ती में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। लेकिन हमें महिलाओं के लिए समान अवसर पैदा करने होंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

मानवाधिकार संरक्षण में सुप्रीम कोर्ट ने निभाई अहम भूमिका : जस्टिस कोहली
पुणे। जस्टिस हिमा कोहली ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने देश में मानवाधिकार संरक्षण और इसके प्रचार में अहम भूमिका निभाई है। वह भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय के न्यू लॉ कॉलेज में मानवाधिकारों पर 11वीं न्यायमूर्ति पीएन भगवती अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में बोल रही थीं। जस्टिस कोहली ने कहा, वर्षों से मानवाधिकारों की परिभाषा को मजबूत करने और बढ़ाने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए गए हैं।

मेनका गांधी बनाम केंद्र सरकार (1978) का मामला जहां याचिकाकर्ता ने उन्हें पासपोर्ट देने से मना करने के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले में सात सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि विदेश यात्रा का अधिकार जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का तत्व है और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना इस अधिकार को कम नहीं किया जा सकता है। जस्टिस कोहली ने कहा, हाल के वर्षों में, न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में सबसे आगे रही है। विशेष रूप से नागरिक स्वतंत्रता, पर्यावरण संरक्षण और लैंगिक न्याय से जुड़े मामलों में।

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