भारत के प्रधान न्यायाधीश ने शीर्ष न्यायपालिका में नियुक्त किए जाने वाले जजों के आवेदनों का मूल्यांकन के लिए रिटायर जजों का एक पैनल बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्होंने संशोधित मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिज्योर (एमओपी) में किए गए इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
बुधवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने चीफ जस्टिस से उनके आवास पर मुलाकात की थी। स्वराज की अध्यक्षता वाला मंत्री समूह एमओपी तैयार कर रहा है। पिछले साल राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को खारिज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कोलेजियम सिस्टम के तहत की जजों की नियुक्ति के लिए एक संशोधित एमओपी तैयार करने को कहा था।
एमओपी एक ऐसा दस्तावेज होगा जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट और 24 हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में दिशानिर्देश होगा। सरकार ने मार्च में सुप्रीम कोर्ट के पास एमओपी भेजा था जिसे चीफ जस्टिस ने कई आपत्तियों के साथ सरकार के पास भेज दिया था। इस मसले पर मतभेदों को दूर करने के लिए ही बुधवार को मंत्रियों और चीफ जस्टिस की मुलाकात हुई थी।