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CJI in Kanaka Temple: सीजेआई चंद्रचूड़ ने की कनक दुर्गा मंदिर में पूजा, जगन रेड्डी ने भेंट की बालाजी की तस्वीर

Fri, 30 Dec 2022 02:14 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला,विजयवाड़ा

सार

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने होटल में सीजेआई चंद्रचूड़ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने जस्टिस चंद्रचूड़ को भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की मूर्ति भेंट की। कनक दुर्गा मंदिर की यात्रा के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ के साथ प्रभारी मंत्री कोट्टू सत्यनारायण मौजूद थे।

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विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर में पूजा करते सीजेआई चंद्रचूड़ - फोटो : twitter
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विस्तार
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देश के प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित कनक दुर्गा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। विशेष पूजा अर्चना के बाद पंडितों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और प्रसाद भेंट किया। 

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इससे पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने होटल में सीजेआई चंद्रचूड़ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने जस्टिस चंद्रचूड़ को भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की मूर्ति भेंट की। कनक दुर्गा मंदिर की यात्रा के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ के साथ प्रभारी मंत्री कोट्टू सत्यनारायण, बंदोबस्ती आयुक्त हरि जवाहर लाल और मंदिर के कार्यकारी अधिकारी डी भ्रामराम्बा मौजूद थे। मंदिर के पुजारी वाद्य यंत्रों की धुन के बीच सीजेआई को देवी मंदिर तक ले गए। जस्टिस चंद्रचूड़ के साथ, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा, रजिस्ट्रार जनरल लक्ष्मण राव, प्रोटोकॉल रजिस्ट्रार राघव स्वामी आदि भी मौजूद थे।

वकीलों की अनुपलब्धता के कारण 63 लाख मामलों में देरी हुई: सीजेआई 
देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार देश भर में 63 लाख से अधिक मामले वकीलों की अनुपलब्धता के कारण और 14 लाख से अधिक मामले दस्तावेजों के इंतजार में लंबित हैं। आंध्र प्रदेश न्यायिक अकादमी के उद्घाटन के अवसर पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि लोगों को जिला अदालतों को अधीनस्थ न्यायपालिका के रूप में मानने की औपनिवेशिक मानसिकता से छुटकारा पाना चाहिए, क्योंकि जिला अदालतें न केवल न्यायपालिका की रीढ़ हैं, बल्कि अनेक लोगों के लिए न्यायिक संस्था के रूप में पहला पड़ाव भी हैं।
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उन्होंने कहा कि जमानत आपराधिक न्याय प्रणाली के सबसे मौलिक नियमों में से एक है, न कि जेल। उन्होंने कहा कि फिर भी व्यवहार में भारत में जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की संख्या एक विरोधाभासी तथा स्वतंत्रता से वंचित करने की स्थिति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए वास्तव में बार के समर्थन की आवश्यकता है कि हमारी अदालतें अधिकतम क्षमता से काम करें। प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यह बहुत अधिक या कम हो सकता है क्योंकि अभी सभी अदालतों से अधिक डेटा प्राप्त होना बाकी है।

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