मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि संवाद और मध्यस्थता के जरिये विवादों को सुलझाने का रास्ता मिल सकता है। इससे तनाव को सहयोग में बदला जा सकता है और आपसी रिश्तों में फिर से सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।
भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि मध्यस्थता की परंपरा विभिन्न समाजों में सदियों से मौजूद रही है और अब इसे मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के जरिये कानूनी पहचान मिली है। उन्होंने कहा, 'मैं कहना चाहूंगा कि केवल झगड़े या असहमति का अस्तित्व ही हमारी शांति को भंग नहीं करता, बल्कि सुनने, सहानुभूति रखने और उसे सुलझाने के लिए वास्तविक प्रयास करने से इनकार करना भी हमारी शांति को भंग करता है। रचनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो संघर्ष विकास और समझ का अवसर बन सकता है।'
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न्याय को सहभागी-समान और सुलभ बनाता है अधिनियम
सीजेआई गवई ने कहा कि यह अधिनियम न्याय को सहभागी, समान और सुलभ बनाता है और साथ ही अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को भी कम करने में मदद करता है। सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर ओडिशा के राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हरीश कुमार टंडन और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
रिश्ते बचाने और सामाजिक सद्भाव बनाने का माध्यम है मध्यस्थता: राज्यपाल
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, राज्यपाल कंभमपति ने कहा कि मध्यस्थता केवल विवाद सुलझाने का जरिया ही नहीं है, बल्कि यह विश्वास कायम करने, रिश्ते बचाने और सामाजिक सद्भाव बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा, 'मध्यस्थता एक शाश्वत अभ्यास है जो संवाद और आम सहमति, मतभेदों को पाटने, संबंधों को सुधारने और निष्पक्ष एवं स्थायी समाधान प्रदान करने पर आधारित है।'
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न्यायिक सुधार के लिए प्रतिबद्ध है ओडिशा: माझी
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि ओडिशा न्यायिक सुधार और वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मध्यस्थता को भारत की न्याय वितरण प्रणाली का आधार बनाने के प्रयासों को और मजबूत करेगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया में दक्षता, समावेशिता और विश्वास सुनिश्चित होगा। उन्होंने सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के शीर्घ क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।