एक नागरिक समाज समूह ने बुधवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिखा। इस समूह ने सत्तारूढ़ पार्टी की एक महिला नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। समूह ने आरोप लगाया कि उन्होंने कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण दिए हैं। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
नागरिक संगठन 'सिटिजन्स फॉर फ्रेटरनिटी-भारत' ने नाजिया इलाही खान की ओर से कथित तौर पर 'कई बार दिए गए भड़काऊ बयानों' को लेकर नवीन को पत्र लिखा। संगठन का कहना है कि नाजिया इलाही खान खुद को सार्वजनिक रूप से भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की पदाधिकारी के रूप में पेश करती हैं।
हालांकि, भाजपा सूत्रों ने कहा कि वह पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा की सदस्य नहीं हैं। सिटिजन्स फॉर फ्रेटरनिटी-भारत एक सामाजिक पहल है, जो समाज में जागरूकता, जिम्मेदार व्यवहार और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने पर काम करती है।
पत्र में किसने हस्ताक्षर किए?
इस पत्र पर पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, लोक नीति विशेषज्ञ अमोघ देव राय, कारोबारी नावेद खान, पूर्व राजनयिक अशोक शर्मा, पत्रकार जावेद एम. अंसारी, उद्योगपति सईद शेरवानी और पूर्व आईएएस अधिकारी आशीष जोशी के हस्ताक्षर हैं।
नाजिया पर क्या आरोप लगाया गया?
पत्र में कहा गया कि हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाजिया इलाही खान ने कथित तौर पर मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार की अपील की और उन्हें सरकारी तथा निजी क्षेत्र की नौकरियों और व्यावसायिक गतिविधियों से बाहर रखने की बात कही।
नागरिक समाज समूह ने कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं, सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं और समानता, भाईचारे तथा सामाजिक सौहार्द जैसे सांविधानिक मूल्यों को कमजोर करते हैं।
ये भी पढ़ें:
'कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ देश, जनता देख रही स्थिरता', 12 साल का कार्यकाल पूरा होने पर पीएम
समूह ने भाजपा से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या नाजिया इलाही खान पार्टी में कोई पद रखती हैं। साथ ही उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, जरूरत पड़ने पर पार्टी से निष्कासन तक का कदम उठाने की भी मांग की गई।
संगठन ने मांग की कि सक्षम अधिकारी 'नफरत फैलाने वाले भाषण' और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करें।