देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा (आईएएस संवर्ग) के अधिकारी एक बड़ी विसंगति का सामना कर रहे हैं। दरअसल, एक ही बैच के आईएएस अधिकारी एक ही समय में अलग-अलग राज्यों व केंद्र में अलग-अलग पद व वेतनमान में तैनात हैं। इससे आर्थिक नुकसान तो है ही, वरिष्ठता-कनिष्ठता की खाईं बननी शुरू हो गई है। यूपी में 1990 बैच के आईएएस अधिकारी अभी प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत हैं।
प्रमुख सचिव वेतनमान वाले अफसरों को पे मैट्रिक्स में लेवल 15 (बेसिक पे -1,82,200 रुपये) का वेतन मिलता है, जबकि अपर मुख्य सचिव व मुख्य सचिव को पे मैट्रिक्स में लेवल- 17 एपेक्स स्केल (2,25,000 रुपये) का लाभ मिलता है। यूपी कैडर के 1990, 1991 व 1992 बैच के अफसरों को अपने ही बैच वाले कई अन्य कैडर के अफसरों के मुकाबले काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
देश में 1984 बैच के एक, 1985 बैच के तीन, 1986 बैच के सात, 1987 बैच के पांच, 1988 बैच के छह, 1989 बैच के पांच, 1990 के बैच तीन, 1991 बैच के दो व 1992 बैच के एक आईएएस अधिकारी मुख्य सचिव के पद पर हैं। इनमें पांडिचेरी के मुख्य सचिव राजीव वर्मा सबसे जूनियर हैं। वह 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
फोन व बैठक तक वरिष्ठता कनिष्ठता का मुद्दा