साल 2022 में मोरबी पुल ढहने, राजकोट गेम जोन में आग लगने और वडोदरा नाव त्रासदी जैसी घटनाओं को लेकर संबंधित नगर आयुक्तों को गुजरात उच्च न्यायालय की फटकार का सामना करना पड़ा है। अदालत ने कहा कि इन घटनाओं से पता चलता है कि नगर आयुक्तों की लापरवाही भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों को असुरक्षित बनाते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने एक आदेश में राज्य सरकार को नगर निगमों के कामकाज की जांच करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि हाल की घटनाओं में संबंधित नगर आयुक्तों की ओर से दायित्वों की लापरवाही दिखाई देती है।
उच्च न्यायालय की ओर से यह आदेश राजकोट टीआरपी गेम जोन में लगी आग को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आया। मई के आखिर में टीआरपी गेम जोन में लगी आग में 27 लोगों की मौत हो गई थी। 13 जून का आदेश रविवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया था।
न्यायालय ने गौर किया कि वडोदरा में हरनी झील नाव दुर्घटना और राजकोट गेम जोन में आग जैसी बार-बार होने वाली घटनाएं दिखाती हैं कि निगमों द्वारा प्रबंधित ऐसे सार्वजनिक स्थान जहां काफी हद तक लोगों का आना-जाना होता है, उन्हें दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के कारण इंसानी जीवन के लिए असुरक्षित रखा गया है।
मोरबी शहर में मच्छू नदी पर ब्रिटिश काल का एक झूला पुलिस 30 अक्तूबर, 2022 को ढह गया था। जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी। जबिक 56 अन्य घायल हो गए थे। वहीं, 18 जनवरी 2024 को वडोदरा शहर के बाहरी इलाके में हरनी झील में एक नाव पलटने से बारह छात्र और दो शिक्षक डूब गए थे। उधर, राजगोट गेम जोन में लगी आग की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) का इंतजार है। लेकिन अपनी निष्क्रियता के लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी या जिम्मेदारियों को तय करने के लिए अब तक कोई फैक्ट-फाइंडिंग जांच नहीं की गई है।