मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भाजपा ने गृहमंत्री शाह की अगुवाई में अपनी विचारधारा से जुड़े कई मुद्दों का समाधान किया। पहली पारी में तीन तलाक कानून को दंडनीय अपराध बनाने के बाद दूसरी पारी के महज छह माह में अनुच्छेद 370 हटाने जैसा बड़ा फैसला हुआ। अब नागरिकता बिल का कानूनी जामा पहनने का रास्ता साफ हुआ। अयोध्या विवाद का समाधान निकला। अब सरकार के पास देशभर में एनआरसी लागू कराना, धर्मांतरण विरोधी कानून बनाना, समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू करना रह गया है।
चार साल बाद कामयाबी
मोदी सरकार के पहले ही कार्यकाल में नागरिकता संशोधन बिल पारित कराने की कोशिश हुई थी। तब वर्ष 2015 में इसे राज्यसभा की मंजूरी भी मिल गई थी। हालांकि संख्या बल के अभाव में सरकार इसे राज्यसभा में पारित नहीं करा पाई।
शिवसेना पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, लोग सत्ता के लिए कैसे-कैसे रंग बदलते हैं। शिवसेना ने लोकसभा में समर्थन किया तो एक रात में ऐसा क्या हो गया जो आज विरोध में खड़े हैं। मुझे आइडिया ऑफ इंडिया की बात मत बताइए। मैं भी यहीं पैदा हुआ हूं और मेरी सात पुश्तें यहीं पैदा हुई हैं। मुझे आइडिया ऑफ इंडिया का अंदाजा है।
'तीन साल में 1984 को नागरिकता इनमें मुस्लिम भी शामिल'
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2016 से 2019 के बीच 391 अफगानी व 1595 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी गई। गृहमंत्री शाह ने बताया कि इनमें मुसलमान भी शामिल हैं। उन्होंने बताया, 15 वर्ष या उससे अधिक समय भारत में रह रहे वीजाधारक विदेशियों के वीजा को एक्स-मिसलीनियस श्रेणी में बदला जाएगा।