लोकसभा में मंजूरी दिलाने के बाद मोदी सरकार को राज्यसभा से भी नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित होने की उम्मीद है। राज्यसभा में बुधवार को दिनभर से इस बिल पर बहस जारी है। सत्ता पक्ष इसके समर्थन में तर्क रहा है, तो विपक्ष इसके खिलाफ।
गृह मंत्री अमित शाह बिल पर सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे हैं। पढ़ें अब तक उन्होंने क्या कहा...
- कांग्रेस और पाकिस्तान के बयान में अंतर नहीं, कल जो इमरान ने कहा आज यहां कहा गया।
- सर्जिकल स्ट्राइक, एयरस्ट्राइक और अनुच्छेद 370 पर भी कांग्रेस और पाकिस्तान के एक जैसे बयान। कांग्रेस पार्टी अजीब प्रकार की पार्टी है। सत्ता में होती है तो अलग भूमिका और अलग सिद्धांत होते हैं।
- कांग्रेस के नेताओं के बयान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने यूएन में भी कोट किया था।
- देश के विभाजन के कारण इस विधेयक की जरूरत पड़ी।
- विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कमरा बंद कर अपनी आत्मा के साथ संवाद कीजिए।अगर यह विधेयक 50 साल पहले लाया जाता तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
- धर्म के आधार पर विभाजन सबसे बड़ी गलती थी। इससे पैदा हुए मुद्दों का, बाद की सरकारों ने हल नहीं किया।
- श्रीलंका से आए तमिलों की समस्याओं के हल के लिए पहले कानून बनाए गए, अब तीन अन्य देशों से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए कानून बनाए जा रहे हैं।
- नागरिकता के लिए मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया क्योंकि प्रस्तावित कानून तीन देशों में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के लिए है।
- उत्पीड़न के शिकार मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करने के लिए मौजूदा कानूनों में प्रावधान हैं, 566 मुसलमानों को भारतीय नागरिकता दी गयी है।
- नागरिकता विधेयक किसी की भारतीय नागरिकता छीनने के लिए नहीं है, मुसलमानों को चिंता करने या भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है।
- नेहरू-लियाकत समझौते के तहत अल्पसंख्यकों को समानता देने की बात कही गई। मगर वहां उन्हें चुनाव लड़ने से रोका गया। उनकी संख्या लगातार घटती रही। जबकि यहां राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस, चुनाव आयुक्त जैसे उच्च पदों पर अल्पसंख्यक रहे।
- हमारे पास पांच साल के लिए बहुमत है, हम भी चाहते तो बाकी की सरकारों की तरह काम कर लेते, लेकिन मोदी सरकार देश की स्थिति को सुधारने के लिए आई है।
- इस विधेयक को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। हम ध्यान भटकाना नहीं चाहते हैं। पिछली सरकारों ने इसे लेकर कोशिश नहीं की। यह विधेयक 2015 में भी लाया गया था।
- अमित शाह ने चिदंबरम और कपिल सिब्बल को जवाब देते हुए कहा कि दोनों संसद को कोर्ट के नाम से डरा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति अदालत जा सकता है। सभी के लिए दरवाजे खुले हैं।
- शिवसेना पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- लोग सत्ता के लिए कैसे-कैसे रंग बदल लेते हैं। शिवसेना ने लोकसभा में इसका समर्थन किया तो फिर एक रात में ऐसा क्या हो गया जो आज विरोध में खड़े हैं।
- अमित शाह ने कहा कि 2005 में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ का जिक्र किया था।
- गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'कपिल सिब्बल कह रहे थे कि मुसलमान आपसे नहीं डरता है। मैं भी तो यही कह रहा हूं कि भारत में रहने वाले किसी भी अल्पसंख्यक को डरने की जरूरत नहीं है।
- यह बिल उनके लिए है जो पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जा रहे हैं। जिनके लिए वहां अपनी जान बचाना, अपनी माताओं-बहनों की इज्जत बचाना मुश्किल है।
- किसी की नागरिकता नहीं छिनेगी। देश के गृह मंत्री पर सभी का भरोसा होना चाहिए।
- इस विधेयक से कई धर्म के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी।
- मगर विपक्ष का ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि मुस्लिमों को क्यों नहीं लेकर आ रहे? आपका धर्म निरपेक्ष काफी सीमित है, लेकिन हमारा नहीं।
- जब श्रीलंका, युगांडा से लोगों को नागरिकता दी तो बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगों को क्यों नहीं दी?
- जब इंदिरा जी ने 1971 में बांग्लादेश के शरणार्थियों को स्वीकारा था तब श्रीलंका के शरणार्थियों को क्यों नहीं स्वीकारा।
- अमित शाह ने आनंद शर्मा को जवाब दिया- आनंद शर्मा ने कहा कि देश का बंटवारा सावरकर के एक बयान की वजह से हुआ था, लेकिन पूरा देश जानता है कि देश का बंटवारा जिन्ना और उनकी मांग की वजह से हुआ था।
- मैं सिक्किम और पुर्वोत्तर के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आर्टिकल-371 को इस बिल की वजह से कोई दिक्कत नहीं होगी। हम कहीं से भी इस आर्टिकल को नहीं हटाने जा रहे हैं।
- कपिल सिब्बल को करारा जवाब दिया। मुझे इंडिया की आइडिया के बारे में नहीं बताइए। मैं भी यहीं पैदा हुआ हूं और मेरी सात पुश्तें भी यहीं पैदा हुई हैं। मुझे भारत के आइडिया का अच्छे से अंदाजा है।