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India or Bharat: 'नागरिक इंडिया या भारत कहने के लिए स्वतंत्र'; सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में की थी टिप्पणी

Tue, 05 Sep 2023 08:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिका में एनजीओ और कॉरपोरेट्स को यह निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि वे सभी आधिकारिक और अनौपचारिक उद्देश्यों के लिए भारत शब्द का इस्तेमाल करें। जनहित याचिका में कहा गया था कि देश के नामकरण के लिए संविधान सभा के समक्ष प्रमुख सुझाव 'भारत, हिंदुस्तान, हिंद और भारतभूमि या भारतवर्ष और उस तरह के नाम थे।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इंडिया बनाम भारत के विवाद में भले ही कांग्रेस समेत विपक्ष और भाजपा के बीच नई बहस पैदा हो गई है, लेकिन शीर्ष कोर्ट ने इस मुद्दे पर साल 2016 में ही बड़ी और अहम टिप्पणी की थी। तब केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में देश को इंडिया के बदले भारत कहे जाने का विरोध किया था।  दरअसल, साल 2015 में शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर कर देश को नाम आधिकारिक रूप से भारत गणतंत्र किए जाने की मांग की गई थी। तब केंद्र सरकार ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद-1 में बदलाव पर विचार किए जाने की कोई परिस्थिति नहीं बनी है। 

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उस जनहित याचिका को खारिज करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि नागरिक 'इंडिया' या 'भारत' कहने के लिए स्वतंत्र हैं। बता दें कि याचिका में एनजीओ और कॉरपोरेट्स को यह निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि वे सभी आधिकारिक और अनौपचारिक उद्देश्यों के लिए भारत शब्द का इस्तेमाल करें।  

2016 में शीर्ष कोर्ट ने की थी टिप्पणी
सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि 'भारत या इंडिया? में से आप इसे भारत कहना चाहते हैं,तो वह कहें। कोई इसे इंडिया कहना चाहता है, उसे इंडिया कहने दें।' बता दें कि महाराष्ट्र के निरंजन भटवाल ने यह याचिका दायर की थी। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने याची को फटकार लगाते हुए 11 मार्च, 2016 को यह भी कहा था कि पीआईएल गरीब लोगों के लिए है। आपको क्या लगता है कि हमारे पास करने के लिए और कुछ नहीं है।
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केंद्र ने दी थी यह दलील
जी20 आमंत्रण पर 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखने के कारण विपक्ष की आलोचना का सामना कर रहे केंद्र ने नवंबर 2015 में शीर्ष अदालत से कहा था कि देश को इंडिया के बजाय 'भारत' कहने की जरूरत नहीं है। केंद्र ने कहा था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद एक में किसी भी बदलाव पर विचार करने के लिए परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

जनहित याचिका का विरोध करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा था कि जब संविधान का मसौदा तैयार करते समय संविधान सभा ने देश के नाम पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया था। मूल मसौदे में भारत का जिक्र नहीं था और बहस के दौरान भारतवर्ष, भारतभूमि, इंडिया दैट इज भारत और भारत दैट इज इंडिया जैसे नामों पर विचार हुआ।

राष्ट्रव्यापी बहस के बीच यह ज्यादा महत्वपूर्ण
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुद्दे पर जनहित याचिका को पहले ही खारिज करना तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, इस मुद्दे पर देश व्यापी बहस शुरू हो गई है। ये बहस तब शुरू हुई जब कांग्रेस ने दावा किया था कि जी-20 समिट के लिए नौ सितंबर को होने वाले रात्रि भोज के लिए जो निमंत्रण पत्र राष्ट्रपति भवन की तरफ से भेजे गए हैं, उनमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' को बदला गया है। रमेश का दावा है कि इसमें इंडिया शब्द को हटाया गया है और 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' का इस्तेमाल किया गया है। 

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