प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आप हर रोज दर्जनों लोगों से गुलदस्ते क्यों स्वीकार करते हैं? क्या आप और सारे मंत्री इस स्वागत प्रक्रिया को रोक नहीं सकते हैं। क्योंकि सिर्फ आपको गुलदस्ता देने में सालाना तौर पर 1.5 करोड़ रुपए सालाना का खर्च आ रहा है।
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नागरिकों से सुझाव मांगे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐप पर ऐसे सुझावों की बाढ़ आ गई है।
एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री से शहीदों के परिवारों के बैंक अकाउंट साझा करने की घोषणा करने को कहा है। ताकि शहीदों के परिवारों की मदद के लिए लोग पैसे दे सकें।
प्रधानमंत्री को दिए गए एक और सुझाव में कहा गया है कि पीएम पन्द्रह अगस्त को अपने भाषण में लोगों से बच्चों को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी फिल्में दिखाने को कहें बजाय इसके कि वे बच्चों संग पिकनिक पर निकल जाएं।
एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री से जम्मू-कश्मीर को दिए गए 80 हजार करोड़ के पैकेज पर विस्तृत रूप से बात करने को कहा है। ताकि यह बताया जा सके कि अगर बीजेपी सांप्रदायिक होती, तो ऐसी घोषणा क्यों करती।
अन्य सुझावों में एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि टेलीविजन पर प्रधानमंत्री का चेहरा थका हुआ दिख रहा है।
'सालाना खर्च 1.5 करोड़ के करीब होगा'
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हालांकि इन सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले सुझावों में सबसे दिलचस्प आशीष आनंद का सुझाव है। आशीष ने कहा है कि 9 अगस्त को जब प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में उतरे, 10-15 गुलाब के गुलदस्तों से उनका स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने इन गुलदस्तों को एक या दो सेकेंड के लिए हाथों में लिया और फिर सिक्योरिटी स्टॉफ को दे दिया।
आनंद ने लिखा है, 'इससे पहले कि खुश्बू प्रधानमंत्री तक पहुंचती, दूसरा गुलदस्ता उनके हाथों में आ जाता। आप (प्रधानमंत्री) हर रोज कई लोगों से मिलते होंगे और स्वागत में आपको गुलदस्ते भेंट किए जाते होंगे।'
आशीष ने गणना की है कि यदि प्रधानमंत्री को प्रतिदिन दस बैठक के हिसाब से 10 गुलदस्ते साल भर में 300 दिन मिलते हैं, तो इसका सालाना खर्च 1.5 करोड़ के करीब होगा।
यदि इनमें मंत्रियों को मिलने वाले गुलदस्ते भी जोड़ दिए जाएं, तो इसका खर्चा बहुत ज्यादा होगा। आनंद का कहना है कि 'हो सकता है कि मेरी गणना गलत हो, क्योंकि मैं आपके शेड्यूल से वाकिफ नहीं हूं। लेकिन यदि मेरी गणना 50 प्रतिशत भी सही है, तो देश के लिए यह राशि बहुत काम आ सकती है। क्या हम इतनी बड़ी राशि को स्वागत के फूलों पर खर्च करना अफोर्ड कर सकते हैं।
'आशीष के आइडिया में दम है'
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उन्होंने आगे कहा है कि प्रधानमंत्री को एक स्वागत कोष शुरू करना चाहिए। इस कोष में उन लोगों से पैसे जमा करने को कहना चाहिए, जो प्रधानमंत्री का स्वागत करना चाहते हो और प्रधानमंत्री को गुलदस्तों को स्वीकार करने की प्रक्रिया कम से कम कर देनी चाहिए।
आनंद की सलाह है कि इस पैसे का उपयोग विकास योजनाओं में हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस आइडिया में दम है।
गौरतलब है कि प्रकाश जावड़ेकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री होते हुए गुलदस्तों से स्वागत को बंद करा दिया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि स्वागत के तौर पर एक छोटा सा फूल ही दें।
वित्तमंत्री अरूण जेटली ने भी प्रतिनिधियों का स्वागत गुलदस्तों से करने को मना किया था। उन्होंने स्वागत में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से खरीदी डीवीडी देने को प्राथमिकता में लाने को कहा था।