सरकार देश की सुरक्षा को लेकर हर संभव कदम उठा रही है। फिर चाहे बात तकनीकी मजबूती की हो या सेना की अन्य आवश्कताओं की। लेकिन भारत के सामने सुरक्षा को लेकर एक नई समस्या आ गई है। इस समस्या का नाम है अन्य देशों द्वारा निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करना। यह देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती है जिससे निपटने के लिए केंद्रीय औघोगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने भारतीय सेना के साथ एक संधि की है। जिसके तहत देशभर के 59 हवाई अड्डों पर तैनात कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसकी पहली ट्रेनिंग बीते महीने ओडिशा के गोपालपुर में हो चुकी है। जिसके तहत कर्मियों को बताया गया कि वह कैसे चीनी और पाकिस्तान मूल के ड्रोन की पहचान कर सकते हैं। ट्रेनिंग में भारत समेत अन्य देशों के ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए। बता दें दिल्ली से भी अज्ञात उड़ने वाली वस्तु के 60-70 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कर्मियों को यह ट्रेनिंग देना आवश्यक था।
सीआईएसएफ के अफसर के मुताबिक भारतीय सेना की भागीदारी से न केवल ड्रोन की पहचान करने में मदद मिलेगी बल्कि इससे यह भी पता चल पाएगा कि किसी अन्य देशों द्वारा ड्रोन से की जा रही निगरानी को कैसे विफल किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मियों को ट्रेनिंग में बताया गया कि भारत और अन्य देशों के ड्रोन में क्या अंतर है और यदि वह ऐसे किसी ड्रोन को उड़ते हुए देखते हैं तो उसकी पहचान कैसे करें।
दिल्ली हवाई अड्डे पर कार्यरत एक अन्य सीआईएसएफ अफसर ने कहा कि इस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा कि ड्रोन द्वारा किए जा रहे प्रयासों को कैसे विफल किया जाए। लेकिन इससे भी पहले यह जानना आवश्यक है कि उसकी पहचान कैसे की जाए। ड्रोन भारत का है या किसी अन्य देश का, इसके लिए ट्रेनिंग में इस बात पर जोर दिया गया कि महज एक बार में देखते ही यह पहचान लिया जाए कि ड्रोन कहां का है। उन्होंने कहा कि ड्रोन और उसके जैसी उड़ने वाली अन्य वस्तुओं की पहचान के लिए दुनिया भर में अलग रडार है और यही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
अफसर ने आगे बताया कि नागरिक उड्डन मंत्रालय विभिन्न तकनीकों की जांच कर रहा है जिससे ड्रोन को पकड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि वह कुछ ऐसी तकनीकों की जांच पहले भी कर चुके हैं जिससे ड्रोन को पकड़ा जाए और संचार तंत्र को रोका जा सके। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक आगे होने वाली ट्रेनिंग में ऐसी तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा जिससे गैरकानूनी ड्रोन के ऑपरेटर का भी पता लगाया जा सके।