प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2022 को लालकिले की प्राचीर से देश को 'पंच प्रण' दिए थे। इनमें एक यह भी था कि औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त भारत का निर्माण करना है। औपनिवेशिक मानसिकता के किसी भी निशान को मिटाना होगा। विकसित भारत, अपनी विरासत, एकता की ताकत पर गर्व करें और नागरिक के कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएं। अब सरकार ने अपने मंत्रालयों/विभागों/पीएसयू में दीवाली पर गिफ्ट के वितरण पर रोक लगाई है। कई वर्षों से मोदी सरकार 'खर्च घटाओ' नीति पर चल रही है। दूसरी ओर, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में डीजी की विदाई परेड पर अच्छा खासा रुपया खर्च हो रहा है। सैंकड़ों जवानों और अधिकारियों को विभिन्न यूनिटों से करीब एक माह पहले से ही परेड स्थल पर बुला लिया जाता है। ताजा मामला सीआईएसएफ का है।
सीआईएसएफ के डीजी राजविंदर सिंह भट्टी, 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्हें विदाई देने के लिए बल की पांचवीं आरक्षित वाहिनी गाजियाबाद में भव्य परेड आयोजित की जाएगी। इस माह के शुरु में सीआईएसएफ के सभी सेक्टरों के महानिरीक्षकों एवं दूसरे अफसरों को एक पत्र भेजा गया था। उसमें सीआईएसएफ के डीजी की परेड को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। इस तरह की परेड के लिए, 25 से 30 दिन पहले अभ्यास प्रारंभ होता है। पत्र में कहा गया था कि अगर किसी सदस्य की इकाई, बदल गई है तो बल की उस नई इकाई को अविलंब उक्त सूचना से अवगत कराया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, इसके अतिरिक्त यदि कोई बल सदस्य, किसी कारण से इकाई से बाहर जैसे अवकाश, अस्थाई कर्तव्य, आंतरिक सुरक्षा कर्तव्य, अटैचमेंट आदि ड्यूटी पर है तो उसके स्थान पर किसी दूसरे उपयुक्त सदस्य, जिसका कद लगभग 178 सेंटीमीटर हो, उसे परेड अभ्यास के लिए भेजा जाए। यह भी कहा गया कि डीजी की परेड के लिए बल सदस्यों को सीडीपी 2025 के दौरान जो नई खाकी वर्दी उपलब्ध कराई गई थी, को आवश्यक रूप से अपने साथ लेकर आएं।
इस पत्र में एनसीआर खंड मुख्यालय के महानिरीक्षक से कहा गया है कि वे संबंधित सेक्टरों के महानिरीक्षकों से संपर्क कर परेड के लिए सदस्यों को निर्धारित समय पर रिलीव कराने की व्यवस्था करें। परेड समाप्त होने के बाद सभी सदस्यों को उनकी यूनिटों में वापस भेज दिया जाए। एक अक्तूबर को अनुपालना रिपोर्ट, बल मुख्यालय को भेजी जाए। सीआईएसएफ में इस तरह की परेड के दौरान बड़े स्तर पर मानव बल की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परेड की तैयारी के लिए लगभग 300 कांस्टेबल, करीब तीन दर्जन सब-इंस्पेक्टर, आधा दर्जन इंस्पेक्टर, डेढ़ दर्जन से अधिक असिस्टेंट कमांडेंट, 2-3 सीनियर कमांडेंट और करीब 100 प्रशासनिक कर्मियों को तीन चार सप्ताह के लिए परेड स्थल पर बुलाया गया है।
देश के विभिन्न हिस्सों से ये कार्मिक, परेड स्थल पर पहुंचे हैं। बल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस तरह के आयोजन, मानव बल की भारी बर्बादी हैं। बीपीआरएंडी के मैनुअल की बात करें तो डीजी की विदाई परेड के लिए केवल तीन कंपनी की स्ट्रेंथ ही काफी होती है। परेड कमांडर, डिप्टी कमाडेंट स्तर का अधिकारी होता है। परेड के लिए दो सीनियर कमाडेंट और एक कमाडेंट को नियुक्त किया गया है। पूर्व के समय में इस तरह के विदाई प्रोटोकॉल में बल मुख्यालय पर प्रतीकात्मक गार्ड ऑफ ऑनर होता था। बाहर से जवानों और अफसरों को बुलाने की जरुरत नहीं पड़ती थी। कर्मियों और अधिकारियों के अलावा दूसरे स्टाफ का यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता, आदि पर लाखों करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं।
सीआरपीएफ के पूर्व डीजी अनीश दयाल सिंह को भव्य विदाई देने के लिए गुरुग्राम में स्थित सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर पर फेयरवेल परेड आयोजित की गई थी। बल की विभिन्न इकाइयों से जवान और अधिकारी गुरुग्राम पहुंचे थे। करीब एक माह पहले तैयारी प्रारंभ हो गई थी। फेयरवेल परेड में 6 कन्टिन्जन्ट 7/7 ब्लॉक फोरमेशन में शामिल हुए। परेड में कुल 12 सहायक कमांडेंट, 36 एसओ और 408 अन्य रैंक के कार्मिक रहे। सीआरपीएफ अधिकारी, एसओ और अन्य रैंक वाले कर्मी, जिनकी लंबाई 180 सैंटीमीटर थी, वे ही फेयरवेल परेड में शामिल हुए।
नवंबर 2023 में सीआरपीएफ के तत्कालीन महानिदेशक सुजॉय एल. थाउसेन की फेयरवेल परेड भी गुरुग्राम में आयोजित हुई थी। जंगल वॉरफेयर के एक्सपर्ट 'कोबरा' कमांडो को डीजी की फेयरवेल परेड में शामिल होने के लिए कहा गया। खास बात है कि उस वक्त वे कमांडो छुट्टी पर थे। मुख्यालय द्वारा कहा गया कि उन्हें छुट्टी से वापस बुलाया जाए। तब कोबरा सेक्टर हेडक्वार्टर के अधिकारी ने आईजी ट्रेनिंग 'मुख्यालय' से आग्रह किया था है कि कोबरा कमांडो को उनके तय लीव शेड्यूल से बीच में बुला लेना ठीक नहीं होगा। इससे उनके मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता है।
पूर्व डीजी, कुलदीप सिंह की फेयरवेल के लिए भी गुरुग्राम में जोरशोर से तैयारी की गई थी। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2022 को खत्म हुआ था। गुरुग्राम स्थित बल के ग्रुप सेंटर पर फेयरवेल परेड के लिए विभिन्न हिस्सों से लगभग 900 जवान और अधिकारियों ने एक सितंबर से पहले ही गुरुग्राम में रिपोर्ट किया था। उनकी फेयरवेल परेड में कुल आठ कंटिंजेंट ने '9/9 ब्लॉक फॉरमेशन में हिस्सा लिया था।
बीएसएफ के पूर्व डीजी पंकज सिंह की सेवानिवृत्ति पर छावला कैम्प में विदाई परेड आयोजित की गई। हालांकि विदाई परेड के दौरान राष्ट्रपति पदक वितरण समारोह आयोजित करने की बात कही गई। बल के एक पूर्व एडीजी के अनुसार, फोर्स पर इतने बड़े खर्च का भार डालना ठीक नहीं है। विदाई देने का कोई दूसरा तरीका अपनाया जा सकता है। मुख्यालय स्तर पर समारोह आयोजित करने का विकल्प मौजूद है। जो अधिकारी व जवान, इस परेड में शामिल होंगे, एक माह के उनके वेतन व भत्तों का हिसाब लगाएं तो वह करोड़ों में पहुंच जाएगा।
विदाई के लिए स्पेशल परेड आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है। बल के पूर्व अफसरों का कहना है कि भारत सरकार, वीआईपी संस्कृति को घटाने में लगी है। केंद्रीय बलों में डीजी फेयरवेल परेड के नाम पर उसे बढ़ावा दिया जा रहा है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) के मैनुअल के अनुसार, डीजी विदाई परेड के लिए ड्यूटी कमांडेंट रैंक के अधिकारी परेड कमांडर, असिस्टेंट कमांडेंट रैंक के अधिकारी परेड कमांडर होंगे। परेड के लिए कुल तीन कम्पनी की संख्या के बराबर जवान तैनात किए जाएंगे।