आधुनिक युद्ध अब पहले जैसे नहीं रहे। ये अब बहुआयामी और सीमाहीन हो गए हैं। इसमें केवल राज्य की सेनाएं नहीं, बल्कि मिलिशिया, विद्रोही गुट और आतंकी संगठन भी शामिल हैं। इस जटिलता ने शांति स्थापना अभियानों को अब तक के सबसे मुश्किल दौर में पहुंचा दिया है। यह बात बृहस्पतिवार को चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (सीआईएससी) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने नई दिल्ली में आयोजित यूएन वार्षिक फोरम के संघर्षरत विश्व में शांति स्थापना और मानवीय अनिवार्यता को आगे बढ़ाना विषय पर दो दिवसीय कार्यक्रम में कही।
यह कार्यक्रम रक्षा थिंक टैंक यूएसआई, सयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) के सहयोग से आयोजित किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि फोरम का विषय प्रासंगिक और सामयिक दोनों है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद 24 अक्टूबर, 1945 को लागू हुआ था। सीआईएससी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र और जिनेवा कन्वेंशन जैसे ढांचे बनाए गए ताकि नागरिकों की रक्षा, युद्ध की भयावहता को कम किया जा सके और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित हो। इन ढांचों ने नागरिकों की सुरक्षा और अंधाधुंध हिंसा पर प्रतिबंध जैसे सिद्धांतों को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के आरंभिक दौर में शांति मिशन की संख्या अपेक्षाकृत सीमित थी। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के लिए 1948 में स्थापित यूएनटीएसओ (संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन) और 1953 में कोरिया में मिशन का उदाहरण दिया।
मानवीय कानून के पालन की चुनौतियां
सीआईएससी दीक्षित ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (आईएचएल) के मूल सिद्धांत अब भी उतने ही प्रासंगिक हैं, लेकिन आधुनिक युद्धों की जटिलता के कारण उनका पालन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा,आधुनिक युद्ध बहुआयामी और सीमाहीन होते जा रहे हैं। आज के संघर्षों में राज्य की सेनाएं, विद्रोही गुट, आतंकवादी संगठन, निजी सैन्य कंपनियां और प्रॉक्सी सेनाएं सब एक साथ सक्रिय हैं और खुली सीमाओं के पार काम करती हैं।
हम वैश्विक भू-राजनीति में एक निर्णायक मोड़ पर खड़े
दीक्षित ने आगे कहा कि इस बात पर मंथन करने की जरूरत है कि शांति स्थापना और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को आधुनिक वास्तविकताओं के अनुरूप कैसे ढाला जाए। उन्होंने कहा, हम वैश्विक भू-राजनीति में एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की संरचना में गहरा बदलाव आ रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था, जो सामूहिक जिम्मेदारी, साझा मानदंडों और मानवीय मूल्यों पर आधारित थी, अब अत्यधिक दबाव में है। उन्होंने बताया कि आज दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में रह रही है, और वर्तमान में 61 सक्रिय संघर्ष चल रहे हैं,जो 1946 के बाद से सबसे अधिक हैं।
अब युद्धों की सीमाएं नहीं रहीं स्पष्ट
मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में अब गैर-राज्य समूह नियमित सेनाओं के साथ या उनके खिलाफ लड़ते हैं, जिससे युद्धक्षेत्र बहु-ध्रुवीय और जटिल बन गए हैं। अब युद्ध केवल देश बनाम देश नहीं रहे, बल्कि अब कई मिलिशिया और गुट एक ही क्षेत्र में लड़ते हैं, जैसा कि लीबिया और सीरिया में देखा गया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में नागरिक आबादी सबसे अधिक प्रभावित होती है।अब आम बात हो गई है कि सैन्य बल नागरिक ढांचों जैसे स्कूल, अस्पताल या बिजली आपूर्ति को निशाना बनाते हैं या नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सख्त रूप से प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि ऐसे उल्लंघन गाजा और सूडान जैसे इलाकों में दर्ज किए गए हैं।
मानवीय संकट की गहराई
आधुनिक युद्ध लंबे समय तक चलते हैं और इनके कारण गंभीर मानवीय संकट पैदा होते हैं। इससे लाखों लोग विस्थापित होते हैं, खाद्य असुरक्षा बढ़ती है और मानसिक आघात भी बढ़ता है। दीक्षित ने सूडान और गाजा में हुई जनहानि और विस्थापन को इसका भयावह उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इन सब चुनौतियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थान आज भी अपरिहार्य हैं। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों ने कई देशों को गृहयुद्ध और तानाशाही से बाहर आने में मदद की है। जिन क्षेत्रों में शांति सैनिक तैनात हैं, वहां नागरिक मौतें कम और शांति समझौते अधिक टिकाऊ होते हैं।
अब खुद शांति सैनिकों पर खतरा
एयर मार्शल दीक्षित ने चेतावनी दी कि अब शांति सैनिकों के सामने भी नए खतरे हैं मसलन, आईईडी हमले, घात लगाकर हमला और ड्रोन अटैक। उन्होंने कहा कि आज शांति अभियान समुदाय अभूतपूर्व जटिलताओं से जूझ रहा है। उनके सामने प्रॉक्सी युद्ध, गैर-राज्य गुट, सीमित संसाधन और नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दोहरी चुनौती मुहं बाएं खड़ी हैं।