केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आधार कार्ड के अभाव में सूचनाओं की जानकारी देने से मना करने को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम का गंभीर उल्लंघन माना है। इसके साथ ही उसने कहा कि यह आवेदक के उत्पीड़न के बराबर है।
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा है कि केंद्रीय जनसूचना अधिकारी (सीपीआईओ) डीके गुप्ता ने आवेदक से पहचान पत्र के रूप में आधार, वोटर आईडी या पासपोर्ट की मांग की और कानूनी नियमों का हवाला दिए बिना बार-बार सूचना देने से मना किया। उन्होंने कहा कि यह तरीका कानूनी नहीं है इसलिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीपीआईओ केवल धारा 8 और 9 के तहत ही जानकारी देने से मना कर सकता है।
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वह जानकारी देने से मना करने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट आदि के रूप में नए आधार नहीं तय कर सकता है। 30 दिन और उसके बाद भी आवेदन की जानकारी न देकर इस धारा का डॉ गुप्ता ने उल्लंघन किया है। आचार्युलु ने कहा कि गुप्ता दोषी हैं और अधिकतम सजा के हकदार हैं। आयुक्त ने गुत्ता को पांच महीनों में 25 हजार रुपये जमा कराने का आदेश दिया है। उन्होंने आगे कहा कि यह बहुत ही दुखद है कि डीके गुप्ता के बाद एसके गुप्ता ने आरटीआई विरोधी रवैया अपनाया।
यह है मामला
आवास और शहरी विकास निगम (हुडको) के तत्कालीन सीपीआईओ पर हुडको द्वारा खरीदे गए तोहफों और उसके मुख्य प्रबंधकीय निदेशकों द्वारा किए गए खर्च के बारे में आरटीआई कार्यकर्ता विश्वास भांबुरकर ने जानकारी मांगी थी। दरअसल, विश्वास भांबुरकर ने 2013 से 2016 के बीच गिफ्ट खरीदने, एशियाड विलेज में उसके चेयरमैन और प्रबंधकीय निदेशक के आधिकारिक आवासों के नवीनीकरण, आधिकारिक आवास के बिजली के बिल और सीएमडी सहित अन्य को दिए गए वेतन में हुडको के कोष से खर्च की हुई राशि की जानकारी मांगी थी।