केंद्रीय सूचना आयोग का लोगो (फाइल)
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केंद्रीय सूचना आयोग ने मंगलवार को सीबीआई से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आरटीआई याचिकाओं को ठुकराने में विवेकपूर्ण रवैया अपनाने को कहा है। सीआईसी ने कहा कि आरटीआई कानून की धारा 24 के तहत जांच एजेंसियों को सूचनाएं साझा नहीं करने की सहूलियत देती है, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सीआईसी ने कहा कि सीबीआई द्वारा ठुकराये गए ऐसे मामले आगे जाकर उच्च न्यायिक अधिकारियों के समक्ष कमजोर पड़ जाते हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में तीन से चार साल का समय लगता है। बाद में इन जानकारियों को मुहैया कराया जाता है जो कानून संगत होता है।
इसलिए सीबीआई को ध्यान रखना चाहिए कि भ्रष्टाचार मामलों की आरटीआई याचिकाओं को लौटाने की बजाय उनके जवाब दिए जाएं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार मामलों में आरटीआई याचिकाओं को किसी भी कानून के आधार पर ठुकराया नहीं जा सकता है। सीआईसी भी कई मामलों में कह चुका है कि यह रवैया ठीक नहीं है।
सीबीआई जिन मामलों को देखती है, उनमें प्रमुख रूप से भ्रष्टाचार के आरोप वाले होते हैं और इनके बारे में जानकारी मांगने वाली आरटीआई याचिकाओं का जवाब आरटीआई कानून के प्रावधानों के अनुसार दिया जाना चाहिए, लेकिन एजेंसी के अधिकारी आमतौर पर सूचना के अनुरोध को खारिज करने के लिए धारा 24 के तहत छूट का उल्लेख करते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीआईसी ने अनेक आदेशों में स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों को छूट नहीं मिली है, लेकिन सीबीआई में आरटीआई याचिकाओं को देखने वाले अधिकारियों के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
ऐसे ही एक आवेदक ने 2017 में सीबीआई द्वारा उसके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के दो मामलों के बारे में सूचना मांगी थी। उसे धारा 24 के तहत एजेंसी को मिली छूट का हवाला देते हुए सूचना नहीं दी गयी।