वायनाड भूस्खलन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
केरल के वायनाड में एक बार फिर भारी बारिश कहर बरपा रही है। 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने जिले के मुंडक्कई और चूरलमाला में बाढ़ और भूस्खलन के हालात पैदा कर दिए हैं। मौजूदा समय में चूरलमाला नदी उफान पर है। गंदा पानी तेजी से बह रहा है तथा बेली पुल के पास तटों को तोड़ रहा है। पिछले साल हुए भूस्खलन जैसे हालात देख यहां लोग दहशत में हैं। कबानी नदी में मनंतवाडी और पनामारम में भी जलस्तर बढ़ रहा है। बाणासुर बांध के पूर्ण क्षमता के करीब पहुंचने के कारण, आस-पास के क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
पिछले साल केरल के वायनाड में 30 जुलाई को हुए भूस्खलन में 200 लोगों की मौत हो गई थी। इस बार भी बारिश यहां पर कहर बरपा रही है। चूरलमाला नदी उफान पर है। नदी के दोनों किनारों पर जमा की गई मिट्टी बह गई है। इससे अट्टामाला में सड़क और आसपास के इलाकों में पानी भर गया है। लोगों का कहना है कि पुंचरीमट्टम के पास वन्य क्षेत्रों में, नए भूस्खलन हुए हैं। जबकि अधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं।
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जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने कहा कि पुंचरीमट्टम के ऊपर जंगल में भूस्खलन की कोई जानकारी नहीं है। केवल पिछली घटनाओं से निकला मलबा बारिश के साथ नीचे आ रहा है। यह कुछ समय तक जारी रहेगा। जब तक कि सभी कटाव वाली सामग्री बह नहीं जाती। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि यह बाढ़ पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते आ सकती है। तत्काल कोई खतरा नहीं है और वे स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
ऑरेंज अलर्ट जारी
भारतीय मौसम विभाग ने वायनाड सहित 11 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें अगले तीन घंटों में मध्यम बारिश और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। वहीं तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलप्पुझा में भी हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
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भूस्खलन से हुई थीं 200 से अधिक मौतें
30 जुलाई 2024 को मूसलाधार बारिश के कारण वायनाड के चूरलमाला और मुंडक्कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 200 से अधिक मौतें हुईं, कई घायल हुए और हजारों लोग बेघर हो गए। इसे केरल के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है।