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अगस्ता-वेस्टलैंड मामला : भारत लाया गया बिचौलिए मिशेल, जानिए क्या है पूरा मामला

Tue, 04 Dec 2018 07:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Christian Michel - फोटो : ANI
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करीब 3600 करोड़ रुपये की अगस्ता-वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील मामले में भारत के हाथ एक बड़ी कामयाबी लग गई है। इस घोटाले में दलाल के तौर पर वांछित चल रहे क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर सीबीआई टीम मंगलवार देर रात भारत पहुंच गई। 

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मिशेल को लेने दुबई पहुंची सीबीआई टीम उसे लेकर दोपहर में दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची, जहां से गल्फस्ट्रीम जेट के जरिए टीम उसे साथ लेकर रात में 10.35 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतर गई। एयरपोर्ट से सीधे उसे सीबीआई मुख्यालय लाया गया, जहां उससे पूछताछ की गई। बुधवार को उसे अदालत में पेश किया जाएगा।
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सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने कहा, मिशेल को वापस लाने के लिए संयुक्त निदेशक साई मनोहर के नेतृत्व में सीबीआई की टीम दुबई भेजी गई थी। ऑपरेशन यूनिकॉर्न के नाम से हुई इस कवायद पर सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निर्देशन में हर पल की गतिविधि पर नजर रख रहे थे।

मिशेल के प्रत्यर्पण का रास्ता पिछले महीने तभी साफ हो गया था, जब दुबई की एक अपीलीय अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी देने वाले निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। खास बात यह है कि प्रत्यर्पण की कार्रवाई मंगलवार को उस समय हुई, जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जाएद के बीच अबू धाबी में दोनों देशों के बीच सहयोग और पुख्ता करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता चल रही थी।

बता दें कि कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए शासन के दौरान 8 फरवरी 2010 को तय हुए इस सौदे में 54 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक मिशेल की भूमिका तीन बिचौलियों में से एक की थी। सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में दो अन्य लोगों गाइडो हासेक और कार्लो गेरोसा को भी बिचौलिये के तौर पर आरोपी बनाया है। भारत ने सीबीआई व ईडी की तरफ से दर्ज मुकदमे के आधार पर 2017 में अधिकृत तौर पर उसके प्रत्यर्पण के लिए यूएई से आग्रह किया था, जहां वह घोटाले के बाद से रह रहा था। इसके बाद मिशेल को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही थी।


 



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मिशेल को मिले थे 225 करोड़ रुपये

ईडी की तरफ से जून 2016 में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, मिशेल पर अगस्ता-वेस्टलैंड कंपनी से करीब 30 मिलियन यूरो यानी 225 करोड़ रुपये लेने का आरोप है। यह पैसा कंपनी की तरफ से 12 हेलीकॉप्टरों के खरीद सौदे को अपने पक्ष में कराने के लिए दिया गया था।

ईडी की जांच में पाया गया कि अगस्ता-वेस्टलैंड से भ्रष्टाचार के लिए मिले पैसे को मिशेल ने अपनी दुबई स्थित कंपनी ग्लोबल सर्विसेज से दिल्ली में दो भारतीयों के साथ मिलकर बनाई मीडिया कंपनी को भेज दिया था, जिसे इस मामले में आगे गड़बड़ी के लिए उपयोग किया गया। ईडी और सीबीआई ने अदालत की तरफ से उसका गैर जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद इंटरपोल से रेड कार्नर नोटिस जारी कराया था।




जनवरी 2014 में सरकार ने खारिज की थी डील
केंद्र सरकार ने 1 जनवरी, 2014 को इटली स्थित फिनमैकेनिका कंपनी की ब्रिटिश सहयोगी फर्म अगस्ता-वेस्टलैंड के साथ भारतीय वायुसेना के लिए 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की डील रद्द कर दी थी। भारत ने इसके लिए कंपनी पर सौदा पक्का करने के बदले 423 करोड़ रुपये की रिश्वत देने और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

इतनी रकम की हुई गड़बड़ी
3600 करोड़ रुपये में हुआ था 12 हेलीकॉप्टर की खरीद का सौदा
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