दुनिया में हैजा घातक होता जा रहा है। 2021 के बाद हर साल इसके मामलों में करीब दोगुनी रफ्तार से वृद्धि देखी जा रही है। 2022 में 4.73 लाख मामले सामने आए थे, जो 2021 की तुलना में दोगुने से अधिक थे। वहीं, 2023 के प्रारंभिक आंकड़ों में सात लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। 2022 की तुलना में 2023 में हैजे के मामलों में 48 फीसदी इजाफा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आगाह किया है कि साफ पानी, साबुन, शौचालय और टीके की कमी के कारण लाखों लोगों पर हैजे का खतरा मंडरा रहा है।
बदलती जलवायु भी वजह
10 वर्षों में सबसे अधिक मृत्यु दर
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 2022 में 44 देशों में हैजे के मामले दर्ज किए गए, जबकि 2021 में 35 देशों ने इसके मामलों की जानकारी दी थी। यही प्रवृत्ति 2023 में भी जारी रही। पिछले 10 वर्षों के दौरान इससे मृत्युदर भी सबसे अधिक रही। वर्तमान में इससे सबसे गंभीर रूप से प्रभावित देशों में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, हैती, सोमालिया, सूडान, सीरिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और दक्षिण पूर्वी एशिया हैं। डब्ल्यूएचओ ने हैजे में हो रही इस अप्रत्याशित वृद्धि के लिए साफ पानी और स्वच्छता तक पहुंच में लगातार अंतराल को भी जिम्मेदार माना है।
टीकों की कमी, खुराक दो से घटाकर एक की
पानी की होने लगती है कमी
हैजा विब्रियो कॉलेरी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलती है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण दस्त (डायरिया) की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। पीड़ित के शरीर में पानी की कमी होने लगती है। दूषित भोजन या पानी का सेवन करने के 12 घंटे से पांच दिन के बीच इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
तत्काल कदम उठाना जरूरी
वैक्सीन को लेकर बनाए अंतरराष्ट्रीय समन्वय समूह (आईसीजी) ने भी दुनियाभर में हैजे के मामलों में वृद्धि से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है। साथ ही बीमारी का तुरंत पता लगाने, स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता और पहुंच में वृद्धि करने, किफायती ओरल टीकों के उत्पादन में तेजी लेन पर जोर दिया है।