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चीनी सेना की ओर से माइक्रोवेव हथियारों के इस्तेमाल के दावे को भारतीय सेना ने नकारा

Thu, 19 Nov 2020 01:16 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock
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भारत ने पूर्वी लद्दाख में हुई चीन के साथ हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों के खिलाफ माइक्रोवेव हथियार इस्तेमाल करने के चीनी मडिया के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि चीन ने माइक्रोवेव हथियार इस्तेमाल करने की फर्जी कहानी गढ़ी, जिसमें कहा गया है कि भारत के साथ हालिया भिड़ंत में चीनी सेना ने पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में तब्दील कर दिया था, जिससे बीजिंग को दो अहम चोटी पर कब्जा करने में कामयाबी मिली।

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भारतीय सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उसका उच्च क्षेत्र में कब्जा अब भी बरकरार है। मीडिया रिपोर्ट में जो दावा किया जा रहा है, वह एकदम झूठ है। लद्दाख में ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई। वाशिंगटन एग्जामिनर की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग के रहने वाले एक प्रोफेसर ने दावा किया था कि चीन ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिससे 15 मिनट में तापमान इतना ज्यादा हो गया था कि चोटी पर कब्जा किए भारतीय सैनिक उल्टी करने लगे थे। वे खड़ा भी नहीं हो पा रहे थे और उन्हें वहां से भागना पड़ा।


इस तरह चीन ने वापस उन चोटियों पर कब्जा किया। यह हमला 29 अगस्त को हुआ था। इस पर भारतीय अधिकारियों ने कहा, अगर उन्होंने हमें वहां से हटा दिया है तो चीन लगातार उन चोटियों से भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग क्यों कर रहा है। हमारे सैनिक और टैंक अब भी वहां डटे हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटे हैं। 
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बता दें कि मीडिया में चल रही कुछ खबरों के अनुसार चीन के एक विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि चीनी सेना ने लद्दाख में भारतीय सेना के कब्जे वाली चोटियां खाली कराने के लिए उन पर माइक्रोवेव हथियारों का इस्तेमाल किया था। यह दावा चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एसोसिएट डीन जिन केनरांग ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम में किया। सोशल मीडिया पर सामने आए इस सेमिनार के एक वीडियो में जिन कह रहे हैं कि भारत की सेना ने दो चोटियों पर कब्जा कर लिया था। सामरिक दृष्टि से ये चोटियां अहम थीं। इसके कारण पश्चिमी थिएटर कमांड ने कैसे भी इन चोटियों को वापस लेने का आदेश दिया था।

जिन ने कहा कि इसके साथ ही चीनी सेना को किसी भी स्थिति में फायरिंग न करने का आदेश भी दिया गया था। इस बीच हमारे सैनिक एक शानदार आइडिया लाए। उन्होंने माइक्रोवेव हथियारों का इस्तेमाल करते हुए चोटियों पर नीचे से हमला किया जिससे ऊपर माइक्रोवेव ओवन जैसी स्थिति बन गई। कई भारतीय सैनिक उलटियां करने लगे और ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। आखिरकार वे चोटियां छोड़ कर चले गए।

क्या होते हैं माइक्रोवेव हथियार और कितने घातक
माइक्रोवेव, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण का एक स्वरूप है। इसका उपयोग खाना बनाने और रडार सिस्टम में किया जाता है। वहीं, हथियार के तौर पर माइक्रोवेव शरीर के ऊतकों (टिश्यू) का तापमान बढ़ा सकते हैं और कानों के माध्यम से सिर के अंदर शॉकवेव (झटका) पैदा करता है। इस तकनीक को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए कई देशों में शोध चल रहा है। ये हथियार कम घातक माने जाते हैं और इनसे गंभीर चोट या मौत का खतरा नहीं होता है।

सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमत हुए हैं दोनों देश
दोनों देशों की सेना लद्दाख सीमा पर फिंगर इलाके में सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमत हुई हैं। सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सीमा पर तनाव घटाने के लिए छह नवंबर को चुशुल में आयोजित दोनों देशों के बीच कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता में पीछे हटने की इसे योजना पर चर्चा की गई थी। दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर के कुछ हिस्सों से पीछे हटने पर सहमति व्यक्त की है, जिसके तहत वे इस साल अप्रैल-मई वाले स्थानों पर वापस लौट जाएंगी। 

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