चीन की हमलावर परमाणु पनडुब्बी के समुद्र में डूबने से दुनियाभर मे उसका मजाक बन रहा है। समुद्र में अमेरिकी नौसेना को टक्कर देने का सपना देख रहे चीन के लिए ये बड़ा झटका माना जा रहा है। घटना एक महीने पुरानी बताई जा रही है। हालांकि चीन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई बयान नहीं आया है।
समुद्र में डूबी सबसे नई और खतरनाक परमाणु पनडुब्बी झोउ क्लास की थी। मीडिया में चल रही रिपोर्ट में कहा गया है कि, वूचांग शिपयार्ड में यह हादसा पिछले मई या जून महीने हुआ था। चीन ने इस हादसे के बारे में पूरी दुनिया से छिपा रखा था। सामने आईं ताजा सैटलाइट तस्वीरों में इस हादसे का खुलासा हुआ है। समुद्र में डूबी इस अटैक पनडुब्बी को अब क्रेन की मदद से निकाला जा रहा है। जिसके फुटेज दुनिया के सामने हादसे की खुलासा हुआ है।
ऐसे खुली चीन की पोल
इस घटना की पुष्टि अमेरिका ने की है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह हादसा बीजिंग के लिए शर्म की बात है। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि, चीन की इस परमाणु पनडुब्बी हादसे में कितने लोगों की मौत हुई है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस पनडुब्बी के अंदर परमाणु ईंधन मौजूद था या नहीं। बताया जा रहा है कि यह पनडुब्बी समुद्र में जाने से पहले आखिरी फिटिंग के दौर से गुजर रही थी। तभी यह हादसा हुआ।
चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नौसेना है। उसके पास के पास 370 से अधिक जहाजों का बेड़ा है। यही नहीं उसने नई पीढ़ी की परमाणु पनडुब्बियों का उत्पादन शुरू कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, वूचांग शिपयार्ड में डूबी इस सबमरीन को समुद्र से निकालने में कई महीने लग सकते हैं। सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि, शिपयार्ड के किनारे कई क्रेन मौजूद हैं, जो सबमरीन को अंदर से निकालने के काम लगी हुई हैं।
चीन ने साधी चुप्पी
वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता इन मामले पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। चीनी अधिकारी ने कहा, "आपने जिस स्थिति के बारे में बात कर रहे हैं, मुझे उस बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल हमारे पास देने के लिए कोई जानकारी नहीं है। चीनी अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज डूबने का कारण क्या था या उस समय उसमें परमाणु ईंधन था या नहीं।
जून में हादसे की शिकार हुई थी ये पनडुब्बी
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के पूर्व सबमरीन वारफेयर अधिकारी टॉम शूगार्ट ने सबसे पहले इस पनडुब्बी के डूबने की जानकारी का पता लगाया है। उन्हें वुचांग शिपयार्ड पर उस समय असामान्य गतिविधियों के बारे में पता चला कि जब अचानक शिपयार्ड पर हेवी क्रेनें पहुंची थीं। जिन्हें 12 से 17 जून के बीच तैनात किया गया था।
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि, यह घटना पीएलए की आंतरिक जवाबदेही और चीन के रक्षा उद्योग की निगरानी पर गहरे सवाल उठाती है। जो लंबे समय से भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। इस बात को लेकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि पीएलए नौसेना डूबने की घटना को छिपाने की कोशिश करेगी।
2035 तक अपने बेड़े में चीन शामिल करना चाहता है 80 पनडुब्बियां
पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक चीन के पास छह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल से लैस पनडुब्बियां और 48 डीज़ल से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां थीं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि चीन 2025 तक इन पनडुब्बियों की संख्या बढ़कर 65 और 2035 तक 80 करने में लगा हुआ है।