चीन के विदेश मंत्री के साथ बैठक।
- फोटो : PTI
वांग यी से मुलाकात करते विदेश मंत्री एस जयशंकर।
- फोटो : PTI
इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत पहुंचने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। विदेश मंत्री वांग यी की यात्रा पर चीन ने कहा कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बनी सहमति और पिछले दौर की सीमा वार्ता के दौरान लिए गए फैसलों पर मिलकर काम करना है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वांग की यात्रा के माध्यम से चीन भारत के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता है ताकि नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को साकार किया जा सके। उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को कायम रखा जा सके। राजनीतिक विश्वास को बढ़ाया जा सके। व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। मतभेदों को उचित तरीके से निपटाया जा सके और चीन-भारत संबंधों के सतत, सुदृढ़ और स्थिर विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय चैनल है। बीजिंग में 23वें दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने परिसीमन, वार्ता, सीमा प्रबंधन तंत्र, सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग पर कई आम सहमतियां हासिल कीं। इस साल की शुरुआत से ही दोनों पक्षों ने राजनयिक माध्यमों से संवाद बनाए रखा है तथा उन परिणामों के कार्यान्वयन को सक्रियता से आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि आगामी वार्ता के लिए चीन मौजूदा सहमति के आधार पर और सकारात्मक एवं रचनात्मक रुख के साथ भारत के साथ गहन संवाद जारी रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में निरंतर शांति बनाए रखने के लिए तैयार है। चीन भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है, सबसे पहले जो सहमति बनी है उसका पालन किया जाएगा और उसके आधार पर सीमा क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए संवाद जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत में वांग यी विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हितों के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।
वांग यी के भारत दौरे का समय बेहद अहम
वांग यी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। भारत ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले की आलोचना की और भारी-भरकम टैरिफ को अन्यायपूर्ण बताया। अमेरिका के टैरिफ के एलान के तुरंत बाद भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने रूस का दौरा किया। इसके बाद डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी को सीमा विवाद पर बातचीत के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे वांग यी ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए चीन दौरे पर जाएंगे। चीन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।