ये संस्थान अलग अलग तरह के वायरस को इकट्ठा करने का चीनी केंद्र है। यहां वायरस के समूहों को इकट्ठा किया जाता है और उन पर शोध होता है। ये एशिया का सबसे बड़ा वायरस बैंक है जहां 1,500 से ज्यादा वायरस को सुरक्षित रखा गया है।
ये एशिया की पहली सबसे ज्यादा सुरक्षित प्रयोगशाला है जिसमें पी4 जैसे खतरनाक वायरस को सुरक्षित रखा जाता है। ये वायरस इंसान से इंसान में तेजी से फैलता है और इबोला जैसी बीमारियों का कारण बनता है।
इस वायरॉलोजी को 2015 में पूरा किया गया था और 2018 में प्रयोग के लिए खोला गया था। इस प्रयोगशाला को बनाने में करीब 42 मिलियन डॉलर खर्च किए गए थे। वुहान के वायरॉलोजी संस्थान में पी3 प्रयोगशाला को भी रखा गया जो 2012 से संचालित है।
प्रयोगशाला के बाहर एक पोस्टर लगा है जिसमें लिखा है कि घबराइए नहीं, आधिकारिक एलानों को सुनें, विज्ञान पर भरोसा रखें और अफवाहें ना फैलाएं।
अमेरिका के सचिव माइक पोम्पियो ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम जानते हैं कि चीन कभी दुनिया के वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला में जाने की अनुमति नहीं देगा, ना ये जानने की कि आखिर वहां क्या हो रहा है? एक रेडियो इंटरव्यू में पोम्पियो ने ये बातें कहीं।
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि इतनी सुरक्षित प्रयोगशाला में सार्स जैसे कोरोना वायरस पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं से संबंधित अपर्याप्त सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता है। वहीं फॉक्स न्यूज़ के मुताबिक प्रयोगशाला में वायरस की चपेट में आए किसी इंसान पर शोध किया जा रहा होगा जिससे ये वायरस वहां से वुहान शहर में फैला।
हालांकि वायरॉलोजी ने इन सभी तरह के अफवाहों को खारिज करते हुए एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि 30 दिसंबर को सबसे पहले किसी अनजान वायरस के सैंपल लैब में आए थे। दो जनवरी को वायरस की जीन के बारे में पता चला और 11 जनवरी को रोगाणु पर विश्व स्वास्थ्य संगठन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाओ लिजियन ने प्रयोगशाला से वायरस के निकलने जैसे सभी आरोपों को खारिज किया। ज़ाओ ने कहा कि ऐसे बयान लोगों को गुमराह करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि ज़ाओ पहले ही इस वायरस को चीन तक लाने का आरोप अमेरिका की सेना पर लगा चुके हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस चमगादड़ से फैला है और बाद में किसी माध्यम के जरिए इंसानों में आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक शोधपत्र जारी किया जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि पहले कोविड-19 के मरीज वुहान के वेट मार्केट से कोई संपर्क नहीं था। साथ ही पहले 41 संक्रमित मामलों में से 13 मामले ऐसे ही हैं जिनका वेट मार्केट से कोई सीधा संपर्क नहीं था।
पी4 प्रयोगशाला की डिप्टी डायरेक्टर और चमगादड़ कोरोना वायरस की बड़ी जानकार शी जेंगली उस टीम का हिस्सा रह चुकी है जिसने इस बात का खुलासा किया था कि सार्स-सीओवी 2 एक चमगादड़ से निकला वायरस है।
साइंटिफिक अमेरिकन के साथ एक इंटरव्यू में शी ने कहा कि सार्स-सीओवी 2 उनकी प्रयोगशाला में जमा और शोध किए गए चमगादड़ों के किसी सैंपल से मेल नहीं खाता है। लंदन के किंग्स कॉलेज में बायोसेक्योरिटी रिसर्चर फिलिप्पा कहती हैं कि अभी तक इसका कोई सबूत नहीं है कि वायरस लैब से फैला है और ना ही इस बात का कि चीन का वेट मार्केट वायरस का मुख्य उद्गम स्थल है।
उन्होंने आगे कहा कि उनके हिसाब से इस महामारी की इजाद अभी भी एक बड़ा सवाल है लेकिन सामने ऐसे कई तथ्य हैं जो ये प्रयोगशाला से वायरस के निकलने की ओर इंगित करते हैं। इसे साबित करने के लिए पर्याप्त जांच की जरुरत है।
लंदन के हाइजिन और ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर डेविड हेमेन ने भी यही कहा कि अभी तक वायरस की उत्पत्ति का कोई वास्तविक सबूत नहीं है लेकिन यह तय है कि ये वायरस चमगादड़ से संबंधित है।