ऐसे देशों के पास अब एक मौका है कि वे दोबारा से अपने आर्थिक विकास को पटरी पर ला सकते हैं। हिंद महासागर के आसपास का इलाका चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
चूंकि पहले से ही भारत इस क्षेत्र में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका निभाने में आगे रहा है, चीन ने लालच भरे अंदाज में कहा था कि भारत बीआरआई प्रोजेक्ट के जरिए पहले वाली भूमिका में आ सकता है।
बता दें कि यह चीनी प्रोजेक्ट विभिन्न देशों के साथ व्यापार बढ़ाने का एक वृहद कार्यक्रम है। आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के मकसद से इसे छह गलियारों के साथ जोड़ने की बात कही गई है।
इसमें एशिया और अफ्रीका के साथ साथ यूरोप को भूमि और समुद्री नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने की बात कही गई है। दरअसल बीआरआई का रोड मैप 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तैयार किया गया था।
वे इस प्रोजेक्ट को दो हजार साल पहले हान राजवंश के दौरान स्थापित सिल्क रोड की अवधारणा से जोड़ते हैं। बीआरआई, चीन के तटीय क्षेत्रों को समुद्री मार्ग के जरिए दक्षिण पूर्व, दक्षिण एशिया, दक्षिण प्रशांत, मध्य पूर्व, पूर्वी अफ्रीका और बाद में पूरे यूरोप से उसे जोड़ने की योजना है।
चीन ने जब पाकिस्तान के साथ मिल कर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रोजेक्ट शुरू किया था, तब भी भारत ने उसका विरोध किया था। इस कॉरिडोर का रास्ता पाक द्वारा कब्जा किये गए कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है।