चीन के यूएन में आतंकी मसूद अजहर पर बैन पर वीटो लगाने का मामला गरमाता जा रहा है। इसके चलते चीन से नाराज भारत द्वारा चीनी फर्मों के सुरक्षा क्लीयरेंस का मामला सुर्खियों में है।
चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स की खबर के अनुसार चीनी फर्मों की सुरक्षा क्लीयरेंस की बात अगर भारत करता है तो उसको ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अखबार के अनुसार भारत सरकार के इस फैसले से चीन से ज्यादा भारत को ही नुकसान होगा।
वहीं दूसरी ओर शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के एक फेलो का मानना है कि सुरक्षा क्लीयरेंस के चलते चीनी कंपनियां भारतीय फर्मों के साथ कारोबार करने से पूर्व एक बार विचार जरूर करेंगी। अगर गहराई से देखा जाए तो इसका असर भारतीय उधोग पर ज्यादा पड़ेगा। हालांकि अखबार का कहना है कि इस सबके बावजूद भारत में पिछले दो साल में व्यापारिक माहौल में सुधार हुआ है।
एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी फर्मों ने भारत में मिली प्रतिक्रिया को अच्छा बताया है। भारत ने उर्जा, रेलवे, दूरसंचार आदि फर्मों के लिए करीब 25 फर्मों को सुरक्षा क्लीयरेंस दिया है।