ऑस्ट्रेलिया की वेबसाइट नाइनन्यूज.कॉम के मुताबिक, चीन ने ऑस्ट्रेलिया से झींगा मछली के आयात पर भी रोक लगा दी है। इस कारण ऑस्ट्रेलिया से निर्यात हुई 20 टन झींगा मछली की खेप शंघाई में क्लीयरेंस के अभाव में फंसी हुई है। ऑस्ट्रेलिया से झींगा मछली के होने वाले निर्यात का 95 फीसदी हिस्सा चीन जाता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया को 75 करोड़ डॉलर की आमदनी होती है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि चीन के कदम से बहुत नुकसान होगा।
चीन के इन कदमों का ऑस्ट्रेलिया में असर दिखने लगा है। वहां के कृषि मंत्री डेविड लिटलप्राउड ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया सरकार चीनी अधिकारियों से बातचीत कर मसले का हल निकालने की कोशिश करेगी। उधर चीन में ऑस्ट्रेलिया के एक पूर्व राजदूत ज्योफ रेबी ने अपनी एक नई किताब में ऑस्ट्रेलिया सरकार को चीन के बारे में अपने सख्त रुख पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया चीन के साथ अपने रिश्ते नहीं संभाल पाया, तो उसे अमेरिका का पिछलग्गू बनकर रहना पड़ेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक, चीन का कदम उसकी जोर जबरदस्ती वाली कूटनीति की मिसाल है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मीडिया को बताया है कि गुजरे दस वर्षों में चीन ने कुल 27 देशों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां की हैं। कुछ दूसरे विश्लेषकों इस सिलसिले में भारत के खिलाफ लद्दाख में चीन की सैनिक कार्रवाई का भी जिक्र किया है।