सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने पड़ोसी देशों की चीन से बढ़ती नजदीकी पर कहा है कि भौगोलिक स्थति के कारण नेपाल और भूटान को भारत के प्रति झुकाव रखना ही होगा। बिम्सटेक साझा सैन्य अभ्यास से इतर रविवार को सेना अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में देशों के बीच संबंध बदलते रहते हैं। जहां तक नेपाल और चीन में नजदीकियों की बात है तो यह अस्थायी चीज है। रावत ने कहा कि जो देश चीन से आर्थिक मदद ले रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता।
रावत ने पाकिस्तान-अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध अब वैसे नहीं है, जैसे 70 साल पहले थे। इसलिए हमें चीन और नेपाल की बढ़ती नजदीकी को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। हमें अपने देश को मजबूत बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है। भारतीय नेतृत्व पड़ोसी देशों से रिश्ते विकसित करने में विश्वास रखता है। हमारा देश काफी बड़ा है।
अगर हम बढ़त लेते हैं तो हर कोई हमारा अनुसरण करेगा। इसलिए हमने यह सैन्य अभ्यास आयोजित किया है। रावत ने दावा किया कि भारत अर्थव्यवस्था के चलते चीन को प्रतिस्पर्धी मानता है। वे बाजार की ओर देख रहे हैं और हम भी। दोनों में प्रतिस्पर्धा है। जो भी बेहतर करेगा, जीतेगा।
नेपाल ने अभ्यास में की शिरकत
इससे पहले रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने साझा सैन्य अभ्यास में नेपाल की हिस्सेदारी की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि नेपाल ने पिछले सभी सम्मेलनों में भाग लिया है। इस बार यह सैन्य अभ्यास है और इसी दौरान उनकी सेना की कमान बदल गई। अभ्यास में नेपाल ने अपने पर्यवेक्षक भेजे हैं इसलिए उनकी ओर से भागीदारी है। हमें अन्य किसी कोण से देखने की जरूरत नहीं है।’
(इनपुट, एजेंसी)