चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नाथू लॉ मार्ग को फिर से ‘बहाल’ करने की पुष्टि की है। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
पिछले साल इस रास्ते से यात्रा नहीं हो पाई थी। दरअसल, तब चीन ने इस मार्ग से ‘सुरक्षित और सुलभ’ यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिस्थितियां अनुकूल न होने की बात कही थी। दोनों देशों की सेनाओं के बीच दोकलम गतिरोध के चलते चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोक दिया था। चीन की मांग थी कि भारत पहले दोकलम से सेना हटाए।
चीनी सेना के भूटान के दावे वाले इलाके में घुस आने पर भारतीय फौज ने हस्तक्षेप किया था। 16 जून को शुरू हुआ यह गतिरोध 73 दिन तक चला। दरअसल, चीनी सेना के
दोकलम में घुस आने से भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ने वाले चिकन नेक (संकरे गलियारे) की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था।
बहरहाल, दोनों सेनाएं लंबी कूटनीतिक कोशिशों के बाद 28 अगस्त को पीछे हट गई थीं। वीके सिंह ने
लोकसभा में बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिसंबर 2017 में चीनी समकक्ष से हुई मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाया था।
चीन की ओर से इस मार्ग से यात्रा बहाल करने की बात कही गई है। इसके पहले, बृहस्पतिवार को चीनी दूतावास में ‘चाइनीज स्प्रिंग फेस्टिवल’ भोज के दौरान चीनी राजदूत लिओ झाओहुई ने कहा, ‘नया साल एक खाली किताब की तरह होता है, और कलम हमारे हाथ में है। हमने भारत-चीन दोस्ती का एक नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है।
हाल ही में चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिएची और विदेश मंत्री वांग यी ने भारत का सफल दौरा किया है। इस तीर्थ यात्रा के लिए व्यवस्था की जा रही है।’ कैलाश मानसरोवर की चार माह चलने वाली यात्रा जून से शुरू होगी।