ब्रिटिश काल के कुछ रेलवे पुलों की स्थिति आजादी के बाद बने पुलों से बेहतर है जबकि आजादी के बाद बनाए गए कई पुलों को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है। संसदीय समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में यह बातें कहीं।
लोक लेखा समिति ने माना है कि अधिकारियों और ठेकेदारों के भ्रष्ट गठजोड़ पुलों को जर्जर बना रहा है और यही गठजोड़ खराब गुणवत्ता के लिए भी जिम्मेदार है। बता दें कि संसद में पेश भारतीय रेलवे के पुलों का रखरखाव नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलों के निर्माण को मंजूरी देने में हुई देरी से यात्रियों की जान खतरे में आ जाती थी।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुझाव दिया कि पुलों के निर्माण ई टेंडर के जरिये किया जाए, जिससे ज्यादा पारदर्शिता आए और अच्छी कंपनियां निर्माण के लिए सामने आएं। यह रिपोर्ट कैग की 2015 रिपोर्ट पर आधारित है।