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भारत से संबंध सुधारने को चीन ने पेश किया नया फॉर्मूला

Mon, 08 May 2017 05:26 PM IST
amarujala.com-Presented by-संदीप भट्ट
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भारत के साथ तनावपूर्ण होते संबंधों के बीच चीन ने रिश्तों में सुधार के लिए चार सूत्री प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें वन बेल्ट वन रोड़ (ओबीओआर) योजना को भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी से मिलाने और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर फिर से बातचीत करना भी शामिल है।
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इसके तहत चीन ने पहली बार भारत के रुख को देखते हुए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपैक) का नाम बदलने की पेशकश की है। यह पेशकश ऐसे समय की गई है जब ओबीओआर योजना पर 14-15 मई को अंतरराष्ट्रीय समिट होने वाली है। गौरतलब है कि सीपैक ओबीओआर का हिस्सा है, जिस पर भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आपत्ति जता चुका है।

भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने कहा कि ओबीओआर पर भारत की कुछ चिंताएं हैं। जिस पर चीन विमर्श कर रहा है। भारत का मानना है कि सीपैक पीओके से होकर गुजरेगा, जिससे हमारी संप्रभुता के लिए खतरा है।
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लेकिन हमारा मानना है कि दोनों देशों को द्विपक्षीय वार्ता से इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। सीपैक का मकसद आर्थिक सहयोग से है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झाओहुई ने कहा, ‘सीपैक से भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इतना ही नहीं हम सीपैक का नाम बदलने की भी सोच रहे हैं। झाओहुई ने यह बयान शुक्रवार को यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया, जिसे चीनी दूतावास ने सोमवार को जारी किया है।
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पहले चीन, पाक नहीं

झाओहुई ने कहा कि भारत आम तौर यह मुद्दा उठाता रहता है कि चीन अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में पाकिस्तान को प्राथमिकता देता रहा है, लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने कहा सीधे शब्दों में हम चीन को पहले रखते हैं और अपने आधार पर समस्याओं से निपटते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर हम 1990 से पूर्व संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के पक्ष में रहे लेकिन बाद में हमने शिमला समझौते के तहत माना कि इस मुद्दे को दोनों देशों को द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहिए।

मधुर हों संबंध
झाओहुई ने चार सूत्री प्रस्तावों के तहत कहा कि दोनों देशों के बीच मधुर संबंध स्थापित करने के लिए और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बातचीत को नए अंदाज में आगे बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा सीमा पर तनाव की स्थिति को कम करने के प्रयास भी शुरू किए जाने चाहिए।
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