भारत की संसद की एक समिति की बैठक में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य गठबंधन, खासकर हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान दिखी उनकी साझेदारी, पर गंभीर चर्चा हुई। समिति के सदस्यों ने इस पर चिंता जताई और भारत की सैन्य तैयारियों व भविष्य की योजनाओं को लेकर जानकारी मांगी। इस संसदीय समिति का नेतृत्व कांग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहे हैं और इसका एजेंडा था: 'भारत की हिंद महासागर रणनीति का मूल्यांकन'। बैठक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
यह भी पढ़ें -
G7: थरूर बोले- जी7 में अब दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नहीं, भारत चीन भी होने चाहिए शामिल
चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर चिंता
समिति के कुछ सदस्यों, खासकर विपक्ष के नेताओं, ने पाकिस्तान और चीन के बीच सैन्य साझेदारी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश की चीन के प्रति बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक और रणनीतिक चुनौती बन सकती हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भारत के रक्षा बजट को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जीडीपी के अनुपात में भारत का रक्षा खर्च पिछले कई दशकों में सबसे कम है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
भारतीय नौसेना की क्षमता और रणनीति
रक्षा सचिव ने समिति को बताया कि भारतीय नौसेना की क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है और उसमें अत्याधुनिक उपकरणों व तकनीकों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नौसेना देश के आर्थिक हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। नौसेना अधिकारियों ने भी समिति को आश्वस्त किया कि भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसेना पूरी तरह से तैयार है और लंबे समय के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
यह भी पढ़ें -
DGCA: छह दिन में एअर इंडिया की 83 उड़ानें रद्द, बोइंग 787 सबसे ज्यादा प्रभावित; डीजीसीए को नहीं मिली कोई खामी
ऑपरेशन सिंदूर और सामरिक संकेत
हालांकि शशि थरूर ने कहा कि बैठक में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर सीधी चर्चा नहीं हुई, लेकिन इससे जुड़े कुछ रणनीतिक संकेतों पर जरूर चर्चा हुई, खासकर चीन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य समर्थन दिए जाने पर। कुछ सांसदों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर यह साफ दिखाता है कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं चीन से मिली तकनीक और हथियारों पर आधारित हैं, जो उनके बीच गहरे सैन्य रिश्तों को दर्शाता है।
हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां
विदेश मंत्रालय की ओर से समिति को बताया गया कि चीन के कई अनुसंधान और सर्वेक्षण जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री व भू-गर्भीय आंकड़े जुटाने के लिए तैनात किए जाते हैं, जिनकी भारत की तरफ करीब से निगरानी की जाती है और जरूरत पड़ने पर राजनयिक स्तर पर कूटनीतिक जवाब दिए जाते हैं।