भारत को पड़ोसी देशों के जरिए घेर कर दबाव में लाने की कोशिश करने वाले चीन का दांव उल्टा पड़ रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव के बीच चीन की बाह्य और आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां अचानक बढ़ गई हैं। हॉन्गकॉन्ग, कोरोना और दक्षिण चीन सागर मामले में अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देश अचानक चीन के खिलाफ हमलावर हुए हैं। जबकि चीन के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक हुवावे के विश्व बाजार में अलग-थलग पडऩे से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की घरेलू मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ गई हैं।
एक सप्ताह पहले तक चीन की भारत को पड़ोसियों के जरिए घेरने की कूटनीति कामयाब होती दिख रही थी। मगर अब बदली परिस्थितियों में नेपाल खुद राजनीतिक संकट में है। जबकि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की नीतियों पर अंदरूनी तौर पर सवाल उठ रहे हैं। भारत ने अपने खिलाफ श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश को भड़काने की चीनी रणनीति को नाकाम करने में सफलता हासिल की है। शीर्ष सूत्रों का कहना है कि भारत की ओर से की गई कूटनीतिक पहल के कारण पाकिस्तान को छोड़ कर अन्य कोई पड़ोसी देश अब भारत के लिए चुनौती नहीं बन रहा है।
चीन के खिलाफ ही बढ़ा गुस्सा
एलएसी पर तनाव के बीच एक सप्ताह पूर्व तक कई देश तटस्थ दिख रहे थे। मगर इसी दौरान अब अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, फ्रांस जैसे देश खुल कर भारत के पक्ष में खड़े हैं। अमेरिका और ब्रिटेन ने चीन को घेरने के लिए बड़ी संख्या में एशिया में सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी है। खासकर ये दोनों देश साउथ चाइना शी में चीन को सबक सिखाने का संकेत दे रहे हैं।
अमेरिका का इस क्षेत्र में परमाणु बेड़ा उतारना और नौसैनिक युद्घाभ्यास ने चीन की चिंता बढ़ाई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि चीन के खिलाफ कई मोर्चे पर नाराजगी ने इन देशों को एकजुट कर दिया है। पहले कोरोना के कारण चीन के खिलाफ गुस्सा था, अब हॉन्गकॉन्ग के सवाल पर गुस्सा बढ़ा है। इससे पहले साउथ चाइना शी में चीन की दादागिरी से अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान जैसे देश पहले से ही खार खाए बैठे थे।