गलवां घाटी में भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प
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गलवां घाटी में चीन की चालबाजी का भारत ने हर स्तर पर जवाब देना शुरू कर दिया है। चीन को भारत की ओर से आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर जवाब देना होगा। यह मानना है राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सलाहकार रहे प्रोफेसर ब्रह्म चेलानी का। उनका मानना है कि चीन आसानी से पीछे हटने वाला नहीं है। वह बातचीत के बहाने समय काटना चाहता है। लेह जाकर प्रधानमंत्री ने अपने पहले के बयान को सुधारा जिसका इस्तेमाल चीन करने लगा था।
जवानों का मनोबल और सिर ऊंचा
प्रोफेसर चेलानी मानते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लद्दाख दौरे से चीन के खिलाफ अपनी आक्रामकता को जाहिर किया। मोदी के इस दौरे ने युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे भारत के लिए सबका ध्यान खींचने में मदद की। मोदी ने अपने संबोधन से जवानों का मनोबल ऊंचा किया। मोदी ने विस्तारवाद का जिक्र किया।
लद्दाख जाकर मोदी ने गलती सुधारी
ब्रह्म चेलानी की राय है कि भले ही मोदी ने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन चीन को साफ संदेश दे दिया। तभी चीन की प्रतिक्रिया भी सामने आई। लद्दाख दौरे से पहले प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक में जो बयान दिया, उसका चीन ने दुष्प्रचार शुरू कर दिया। चीन की सरकारी मीडिया ने दुष्प्रचार किया कि मोदी टकराव नहीं चाहते। लद्दाख दौरे से इस दुष्प्रचार को भी विराम लगा और मोदी ने गलती भी सुधार ली।