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27 देशों के साथ है चीन का विवाद, छह देशों के 41 लाख वर्ग किमी क्षेत्र पर किया कब्जा

Sun, 05 Jul 2020 02:37 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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लद्दाख की गलवां घाटी में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद जारी है। भारत पहला देश नहीं है जिसके साथ चीन का विवाद है। चीन का 27 देशों के साथ विवाद है। एक दौर था जब दुनिया के ताकतवर देश अपना दबदबा बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे देशों को निशाना बनाते थे। वे उन देशों की सुरक्षा के बदले उनसे सालाना एक तरह से फिरौती लेते थे। चीन भी इसी नीति पर चल रहा है। वह छोटे-छोटे देशों को कवर देने के बदले उनकी जमीन या दूसरे संसाधनों पर कब्जा जमाने की फिराक में है। 

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भारत के साथ लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में आए दिन होने वाली चीन की घुसपैठ, जापान, फिलीपींस और अन्य देशों के साथ दक्षिण चीन सागर से जुड़ा मुद्दा हो, या फिर श्रीलंका में निवेश के बदले हंबनटोटा पोर्ट हथियाने की कोशिश, यह उसकी इसी विस्तारवादी नीति का नतीजा है। 

यही वजह है कि दुनिया के 27 देशों ने उसकी हरकतों से तंग आकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जाने का फैसला किया है। अमेरिका और ब्रिटेन की अपील पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा भी हुई है। चूंकि जमीन हड़पने की विस्तारवादी नीति मौजूदा दौर में संभव नहीं है, इसलिए चीन ने ताकत बढ़ाने के लिए आर्थिक गतिविधियों को हथियार बनाया है।
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छह देशों पर कब्जा या हक जताता है चीन
चीन छह देशों- पूर्वी तुर्किस्तान (इसे वह शिनजियांग प्रांत बताता है), तिब्बत, इनर मंगोलिया, ताइवान, हांगकांग और मकाऊ पर कब्जा कर चुका है या इन्हें अपना हिस्सा बताता है। इन सभी देशों का कुल क्षेत्रफल 41,13,709 वर्ग किमी से ज्यादा है। यह चीन के कुल क्षेत्रफल का करीब 43 फीसदी है।

पूरी तरह चीन पर निर्भर पाकिस्तान
पाकिस्तान को चीन पहले ही कर्ज के जाल में फंसा चुका है। इसमें चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अहम प्रोजेक्ट है। ये पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से समुद्र के रास्ते चीन के झिंजियांग तक पहुंचने का बड़ा प्रोजेक्ट है। 2442 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट के जरिए कच्चा तेल, नैचुरल गैस जैसी चीजों का ट्रांसपोर्ट आसान होगा। पाकिस्तान को चीन करीब 3.45 लाख करोड़ रुपये देगा। इसके अलावा चीन ग्वादर में अपने पांच लाख नागरिकों को बसाने वाला है।

दक्षिण चीन सागर को लेकर आधा दर्जन देशों से विवाद

दक्षिण चीन सागर को लेकर आधा दर्जन देशों से विवाद
दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन का करीब आधा दर्जन देशों के साथ विवाद चल रहा है। जापान के साथ दक्षिणी चीन सागर और सेनकाकू द्वीप को लेकर तनातनी का माहौल है। चीन इस द्वीप पर दावा ठोक रहा है। 

हांगकांग में चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर विवाद
हांगकांग में एक साल से चीन से आजादी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में चीन ने हांगकांग के लिए नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पास किया है। इससे हांगकांग के लोगों के सभी विशेष अधिकार खत्म हो जाएंगे। इसका मतलब यह भी होगा कि हांगकांग में ना तो चीन का कोई विरोध कर सकेगा ना ही उसके खिलाफ प्रदर्शन कर सकेगा। अमेरिका और ब्रिटेन ने इसका कड़ा विरोध किया है।

श्रीलंका में बढ़ाया निवेश
श्रीलंका में चीन का निवेश बड़े पैमाने पर बढ़ा है। श्रीलंका ने उसे हंबनटोटा बंदरगाह 99 साल की लीज पर दिया है। इसके अलावा चीन ने श्रीलंका में एयरपोर्ट, कोल पावर प्लांट और दो बड़े डैम सहित कई इंफ्रा प्रोजेक्ट में निवेश किया है। चीन यहां करीब 36 हजार करोड़ रुपये निवेश कर रहा है। 

ये देश हैं चीन के नए शिकार
चीन ने अब लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों में दबदबा बना लिया है। 2010 से पहले इन देशों में उसका निवेश सिर्फ 35000 हजार करोड़ रुपये का था। पिछले 10 साल में यह पांच गुना बढ़कर 1.87 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इकोनॉमिक कमीशन फॉर लैटिन अमेरिका एंड कैरेबियन के मुताबिक इस क्षेत्र में 2017 तक कुल निवेश का 65 फीसदी अमेरिका और यूरोपीय देशों का था। इसमें अमेरिका का निवेश करीब 28 फीसदी था। चीन इस मामले में तब तक पीछे था, लेकिन पिछले तीन साल में इन क्षेत्रों में कुल निवेश का 42 फीसदी अकेले चीन ने निवेश किया है। 
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इन देशों में चीन ने किया भारी निवेश

  • पाकिस्तान में 27 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • इंडोनेशिया में 1.41 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • बांग्लादेश में 7.33 लाख करोड़ रुपये का निवेश
  • ऑस्ट्रेलिया में 7.33 लाख करोड़ रुपये का निवेश
  • फिलीपींस में 1.41 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • जापान में 73 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • ताइवान में 27 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • हांगकांग में 27 हजार करोड़ रुपये का निवेश
  • श्रीलंका में 27 हजार करोड़ रुपये का निवेश
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