लद्दाख की गलवां घाटी में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद जारी है। भारत पहला देश नहीं है जिसके साथ चीन का विवाद है। चीन का 27 देशों के साथ विवाद है। एक दौर था जब दुनिया के ताकतवर देश अपना दबदबा बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे देशों को निशाना बनाते थे। वे उन देशों की सुरक्षा के बदले उनसे सालाना एक तरह से फिरौती लेते थे। चीन भी इसी नीति पर चल रहा है। वह छोटे-छोटे देशों को कवर देने के बदले उनकी जमीन या दूसरे संसाधनों पर कब्जा जमाने की फिराक में है।
भारत के साथ लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में आए दिन होने वाली चीन की घुसपैठ, जापान, फिलीपींस और अन्य देशों के साथ दक्षिण चीन सागर से जुड़ा मुद्दा हो, या फिर श्रीलंका में निवेश के बदले हंबनटोटा पोर्ट हथियाने की कोशिश, यह उसकी इसी विस्तारवादी नीति का नतीजा है।
यही वजह है कि दुनिया के 27 देशों ने उसकी हरकतों से तंग आकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जाने का फैसला किया है। अमेरिका और ब्रिटेन की अपील पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा भी हुई है। चूंकि जमीन हड़पने की विस्तारवादी नीति मौजूदा दौर में संभव नहीं है, इसलिए चीन ने ताकत बढ़ाने के लिए आर्थिक गतिविधियों को हथियार बनाया है।
छह देशों पर कब्जा या हक जताता है चीन
चीन छह देशों- पूर्वी तुर्किस्तान (इसे वह शिनजियांग प्रांत बताता है), तिब्बत, इनर मंगोलिया, ताइवान, हांगकांग और मकाऊ पर कब्जा कर चुका है या इन्हें अपना हिस्सा बताता है। इन सभी देशों का कुल क्षेत्रफल 41,13,709 वर्ग किमी से ज्यादा है। यह चीन के कुल क्षेत्रफल का करीब 43 फीसदी है।
पूरी तरह चीन पर निर्भर पाकिस्तान
पाकिस्तान को चीन पहले ही कर्ज के जाल में फंसा चुका है। इसमें चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अहम प्रोजेक्ट है। ये पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से समुद्र के रास्ते चीन के झिंजियांग तक पहुंचने का बड़ा प्रोजेक्ट है। 2442 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट के जरिए कच्चा तेल, नैचुरल गैस जैसी चीजों का ट्रांसपोर्ट आसान होगा। पाकिस्तान को चीन करीब 3.45 लाख करोड़ रुपये देगा। इसके अलावा चीन ग्वादर में अपने पांच लाख नागरिकों को बसाने वाला है।