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शोध: बचपन में टीबी होने से इलाज के बाद भी कमजोर हो जाते हैं फेफड़े, शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर लगाया पता

Thu, 20 Apr 2023 06:12 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अध्ययन के अनुसार, 12 महीने, 24 महीने या 36 महीने के होने से पहले अगर बच्चों को पीटीबी होता है, तो उनमें बोलते समय घरघराहट होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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टीबी के मरीज (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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बचपन में टीबी होने पर उपचार के बाद भी बच्चों के फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। एक नए अध्ययन में पता चला है कि पांच वर्ष या इससे कम उम्र के बच्चों में पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (पीटीबी) होने पर उनके फेफड़े कमजोर होने तथा बाद में लंबाई और वजन न बढ़ने का खतरा अधिक होता है।
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अध्ययन के अनुसार, 12 महीने, 24 महीने या 36 महीने के होने से पहले अगर बच्चों को पीटीबी होता है, तो उनमें बोलते समय घरघराहट होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यह अध्ययन ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन’ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के प्रमुख लेखक लियोनार्डो मार्टिनेज और केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका स्थित रेड क्रॉस वॉर मेमोरियल चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, केप टाउन विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के सहयोगियों ने 1,068 बच्चों पर यह शोध किया। उन्होंने इन बच्चों के के स्वास्थ्य पर जन्म से लेकर नौ साल तक लगातार नजर रखी। अध्ययन में शामिल अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वैज्ञानिकों ने कहा कि पीटीबी प्रभावित बच्चों के लिए उपचार मौजूद हैं। लेकिन किसी भी अध्ययन में इस बीमारी से उबरने के बाद बच्चों के स्वास्थ्य पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

एक साल की उम्र से पूर्व टीबी होने पर वजन में आई कमी
शोधकर्ताओं ने कहा, हमने पाया कि जिन बच्चों को एक साल की उम्र से पहले टीबी हो गई थी, उनका वजन तथा उनका बीएमआई (बॉडी मास इन्डेक्स) पांच साल की उम्र तक सामान्य से कम था।
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1-4 साल के पीटीबी से पीड़ित बच्चों की लंबाई कम
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन बच्चों को एक साल से चार साल की उम्र के बीच पीटीबी हुआ था, उनकी लंबाई उनकी उम्र को देखते हुए कम थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि पीटीबी अपने तीव्र संक्रमण और बीमारी के बाद फेफड़ों की कार्यप्रणाली को कमजोर कर देता है।

90 फीसदी से अधिक मामलों में फेफड़ों में संक्रमण
पल्मोनरी टीबी में ट्यूबरकुलोसिस के बैक्टीरिया फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। टीबी के 90 फीसदी से अधिक मामलों में फेफड़ों में संक्रमण होता है। जब टीबी के बैक्टीरिया फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे अंग जैसे ब्रेन, लिवर, पेट, गले आदि को प्रभावित करते हैं, तो इन्हें एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है।
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