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कंधे में लगी गोली खुद ही निकाली

Fri, 10 Nov 2017 06:18 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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पायल (बदला हुआ नाम)
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उम्र 14 वर्ष
तीन लोगों ने 13 दिनों तक गैंग रेप किया

मैं सुबह 6.30 बजे दूध लेने निकली लेकिन रास्ते में ही मुझे कुछ लोगों ने उठा लिया और फिर मेरे साथ जो हुआ वो किसी के साथ भी न हो। मेरे साथ 13 दिनों तक जो हैवानियत हुई वो तो बताई नहीं जा सकती लेकिन अब वो किसी के साथ न हो उसके लिए मैं जरूर काम करना चाहती हूं।  मैं घर से निकली तो दूध लाने थी लेकिन वापस पिता के कंधों पर आई। 

जब मैं काफी देर तक नहीं आई तो परिवारवाले मुझे ढूंढने निकले लेकिन मैं तो उन दरिंदों के कब्जे में थी। माता-पिता कई दिनों तक आस पड़ोस में ढूंढते रहे लेकिन मैं उन्हें नहीं मिली।  फिर हार कर मेरे परिवार वालों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।  फिर एक दिन मेरे बारे में मां पिता को पता चला तब तक 13 दिन बीत चुके थे और मैं अस्पताल में मिली।  
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13 दिनों तक वो लोग मेरे साथ दरिंदगी कर रहे थे। वो मुझे मारते थे। मेरे साथ बलात्कार के दौरान मारपीट की जाती थी। मैं हर दिन मर रही थी। फिर एक दिन वो आया जब उन्हें लगा कि मैं मर चुकी हूं तो वो मुझे एक खुले मैदान में ले गए। मैं उनका चेहरा पहचान चुकी थी वो दरिंदे हर दिन बात करते थे कि वो मुझे मार दें अगर मैं जिंदा रही तो उनकी पहचान उजागर हो जाएगी।
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उन्होंने मेरी छाती पर दो गोलियां भी मारीं थी

रेप - फोटो : SELF
इसीलिए उन्होंने मेरी छाती पर दो गोलियां भी मारीं। लेकिन मैं तो जिंदा रहना चाहती थी। मैंने खुद से ही एक गोली निकाल ली। मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी मैं बेहोश हो चुकी थी।  वो दरिंदे मुझे मरा समझकर छोड़ गए थे। मुझे ये भी नहीं पता चला कि मैं अस्पताल कैसे पहुंची। जब मुझे होश में आया तो मैं अस्पताल में थी।   

जब मेरे माता-पिता को मेरे अस्पताल में होने की खबर मिली तो दोनो बदहवाश से भागते हुए आए। लेकिन मैंने कही मन ही मन में ठान लिया था कि मैं जिंदा रहूंगी। मुझे जीना है। मेरे साथ हुई दरिंदगी भी मेरे जीने के जज्बे को खत्म नहीं कर सका। मेरे सीने में आज भी एक गोली फंसी हुई है।  

मेरे साथ जो कुछ भी हुआ उसके बारे में पूरे मुहल्ले का पता चल चुका था। मुझे लोग गलत नजरों से देखते थे मुझे अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी। मेरी मां दिहाड़ी मजदूर हैं, उसकी जिंदगी मेरे लिए इंसाफ मांगने में बीत रही है। वो कभी वकील का चक्कर लगा रही है तो कभी कोर्ट का। 

मैं कुछ करना चाहती हूं। मैं पढ़ लिख कर सोशल वर्कर बनना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि जो मेरे साथ हुआ वो किसी के साथ न हो लेकिन अगर किसी के साथ ऐसा होता है तो मैं उसके लिए मजबूती से लड़े। मैं उनकी मदद के लिए और उनका आत्मबल बढ़ाने के लिए मदद करना चाहती हूं।  
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