उम्र -18 साल
मिर्जापुर
मैं बड़ी होकर पर्वतारोही बनना चाहती हूं, उसके साथ मैं इंजीनियरिंग भी करूंगी। लेकिन ये सारे ख्वाब उस समय छोटे लगने लगते हैं जब मैं गांव की महिलाओं और बच्चियों की पर्सनल प्राइवेसी के बारे में सोचती हूं। मैं खुद की, लड़कियों की और महिलाओं के हाइजिन के बारे में सोचती हूं।
मैं अब 18 साल की हो चुकी हूं, हमारा गांव उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का छोटा सा गांव है इमरती। छोटा और पिछड़ा हुआ। मेरे गांव की महिलाएं आज तक खुले मे नहाती और शौच करती थीं। फिर मैंने कुछ लड़कियों के साथ मुहिम चलाई, परिवार वालों से कहा कि घर में बाथरूम बनवाएं। अगर पैसे नहीं है तो कम से कम बांस और कपड़े से घेर कर बाथरूम का आकार दें जिससे घर की बेटियां और महिलाएं पीरिएड्स के दिनों में कम से कम अपने गंदे कपड़े बदल सकें।
मैंने पापा से कह कर सबसे पहले अपने घर में बाथरूम बनवाया और फिर गर्व से बाहर निकली और पूरे गांव में महिलाओं के हक के लिए बात की। मैं गांव के प्रधान के साथ साथ डिविजनल
कमिशनर से भी इस विषय पर बात की और आज गांव पूरी तरह से शौच मुक्त हो चुका है, अब कोई भी महिला या पुरुष खुले में शौच नहीं करता है।
शुरू-शुरू में तो मेरे इस कदम का पूरे गांव में बहुत विरोध हुआ, मुझे बेशर्म से लेकर कई तरह की बातें कही गईं लेकिन आज जब गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बाथरूम और टॉयलेट बन गए हैं अब महिलाएं कभी भी बाथरूम जा सकती हैं। अंधेरे होने का इंतजार नहीं करते है तो हर कोई मुझे पसंद करने लगा है सभी मेरी तरह ही बेटी चाहता है।