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बिहार में नहीं बंगाल में होते हैं सबसे ज्यादा बाल विवाह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 09 Feb 2019 03:15 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

अगर आप सोच रहे हैं कि बिमारु राज्य (बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) बाल विवाह के मामले में टॉप पर हैं तो आप गलत हैं। दोबारा सोचिए.... अब पश्चिम बंगाल ऐसे राज्यों में पहले नंबर पर आ गया है, जहां 15-19 की उम्र में लड़कियों की सबसे अधिक शादियां होती हैं। ये राज्य इस मामले में राजस्थान से भी आगे है, जहां सदियों से बाल विवाह जैसी प्रथा प्रचलित है। 



केवल बहतर शिक्षा और उच्च आय ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोक पाने में कारगर सिद्ध हुए हैं। इस मामले में अब बिहार, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश की दशा सुधरी है, वहीं उत्तर प्रदेश में 15 से 19 साल की केवल 6.4% लड़कियों की शादी होती है।


अब बंगाल जैसे राज्यों में बाल विवाह की दर लगातार बढ़ती जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (एनएफएचएस-4)  साल 2015-16 में हुआ है। बाल विवाह के लिए राष्ट्रीय औसत 15-19 वर्ष की सभी लड़कियों का 11.9 फीसदी है।

बंगाल में खराब हालात, यूपी चमका

11 राज्यों में बाल विवाह का स्तर राष्ट्रीय औसत स्तर से भी अधिक है। जब एनएफएचएस-3 साल 2005-06 के बीच हुआ तो बाल विवाह के मामले में 47.8 फीसदी आंकड़े के साथ टॉप पर बिहार था। झारखंड 44.7 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर, राजस्थान 40.4 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर और बंगाल 34 फीसदी के साथ चौथे नंबर पर था। लेकिन अब दस सालों में बिमारु राज्यों (बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) में बाल विवाह 20 फीसदी पॉइंट तक कम हुआ है।



इसी समय अवधि में बंगाल में केवल 8.4 फीसदी की कमी आई है। एनएफएचएस-4 में जिला स्तर पर विश्लेषण करने पर पता चला है कि बंगाल के मुर्शीदाबाद में सबसे अधिक 39.9 फीसदी बाल विवाह होते हैं। दूसरे नंबर पर गुजरात का गांधी नगर 39.3 फीसदी के आंकड़े के साथ है और तीसरे नंबर पर 36.4 फीसदी के साथ राजस्थान का भीलवाड़ा जिला है।


बिहार के 20, बंगाल के 14 और झारखंड के 11 जिले इस मामले में सबसे आगे हैं। यानि 15 साल से कम उम्र के बच्चों का भी बाल विवाह हो रहा है। 19 साल की उम्र में जिन लड़कियों की शादी हो रही है उनका आंकड़ा 20.5 फीसदी है। 18 साल की लड़कियां 19.8 फीसदी, 17 साल की लड़कियां 11 फीसदी, 16 साल की लड़कियां 5.6 फीसदी और 15 साल की लड़कियों का आंकड़ा 2.7 फीसदी है।

शहरी भारत के ग्रामीण से बहतर हैं हालात

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बाल विवाह के मामले में शहरी भारत की स्थिति ग्रामीण भारत से अधिक बहतर है। जहां यह आंकड़ा ग्रामीण भारत में 14.1 फीसदी है, वहीं शहरी भारत में 6.9 फीसदी है। इसका सीधा संबंध पारिवारिक आय से भी है। अगर किसी परिवार की आय अच्छी है तो वह अपने घर की बेटी को अधिक पढ़ाएगा-लिखाएगा और उसका बाल विवाह नहीं करेगा। 



वहीं हरियाणा जैसे राज्य के शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की दर 41 फीसदी है, तमिलनाडु में 37 फीसदी, महाराष्ट्र में 33 फीसदी है और मणिपुर में 32 फीसदी है।

सबसे अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति में बाल विवाह

सबसे अधिक बाल विवाह अनुसूचित जाति की लड़कियों में 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति में 13 फीसदी है। हालांकि बाल विवाह के मामले में टॉप 10 राज्यों में जाति के मामले में थोड़ा सा बदलाव है। महाराष्ट्र में 38 फीसदी चाइल्ड ब्राइड अगड़ी जातियों से हैं। आंकड़ों से सामने आया है कि गरीब तबके में ऐसी शादियां सबसे अधिक 16.6 फीसदी है, मध्यम वर्ग में 12.7 फीसदी और अमीर वर्ग में 5.4 फीसदी होती हैं।

शिक्षा भी है मददगार 

अशिक्षित लोगों में बाल विवाह का आंकड़ा 30.8 फीसदी है, प्राथमिक शिक्षा प्राप्त वाले लोगों में 21.9 फीसदी बाल विवाह होते हैं, माध्यमिक शिक्षित लोगों में 10.2 फीसदी बाल विवाह होते हैं, जबकि उच्च शिक्षित लोगों में केवल 2.4 फीसदी ही बाल विवाह होते हैं।



इस मामले में सबसे बड़ी समस्या है सामाजिक दबाव और परिवार नियोजन की जानकारी न होने के कारण कम आयु में ही बालिकाओं का गर्भवती होना। 15 साल से 19 साल तक की लड़कियों में जिनका बाल विवाह होता है उनमें हर तीन में से एक लड़की टीनएज उम्र में ही मां बन जाती हैं। इनमें से चौथाई लड़कियों को तो 17 साल की उम्र तक बच्चा हो जाता है। 18 साल की उम्र वाली 31 फीसदी लड़कियां मां बन जाती हैं। लड़कियों के आगे चलकर आत्मनिर्भर बनने और शिक्षा ग्रहण करने के अवसर भी उनके मां बनने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं।
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बाल विवाह के मामले में 13 साल से कम उम्र की 0.6 फीसदी लड़कियां मां बन जाती हैं, 13 साल की उम्र की 0.8 फीसदी लड़कियां मां बनती हैं, 14 साल की लड़कियों में मां बनने वाली 2.8 फीसदी, 15 साल की उम्र में 7.7 फीसदी, 16 साल की उम्र में 16.5 फीसदी, 17 साल की उम्र में 26.6 फीसदी, 18 साल की उम्र में 30.7 फीसदी और 19 साल की उम्र में 14.3 फीसदी हैं। जिन राज्यों में लड़कियां सबसे अधिक टीनएज अवस्था में गर्भवती हो जाती हैं, उनमें गोवा सबसे ऊपर है। यहां ऐसे 64 फीसदी मामले आए हैं, मिजोरम में 61 फीसदी और मेघालय में 53 फीसदी ऐसे मामले हैं। 

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