भारतीय सेना अब पारंपरिक उग्रवाद विरोधी अभियानों से आगे बढ़कर अंतरिक्ष और साइबर जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस हो चुकी है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान का यह बयान साफ करता है कि सेना जहां एक तरफ जनता का दिल जीतना जानती है, वहीं दूसरी तरफ दुश्मन को 400 किलोमीटर दूर से अचूक निशाना बनाने में भी पूरी तरह सक्षम है।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भारतीय सेना के बदलते स्वरूप को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए सेना के मानवीय चेहरे और आधुनिक युद्ध कौशल दोनों पर खुलकर चर्चा की। जनरल चौहान ने दो घटनाओं का जिक्र किया।
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मानवीय भूगोल और जनता से जुड़ाव
सीडीएस ने बताया कि उन्होंने मणिपुर के सेनापति जिले में 59वीं ब्रिगेड और बारामूला में 19वीं ब्रिगेड की कमान संभाली थी। यह दोनों ही इलाके उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित रहे हैं। जनरल चौहान के अनुसार, यह पूरी तरह जनता पर केंद्रित संघर्ष था। ऐसे संवेदनशील इलाकों में मानवीय भूगोल बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि आज 15 से 20 साल बीत जाने के बाद भी वहां के लोग उन्हें याद करते हैं। लोग आज भी उन्हें फोन करते हैं। वह दोबारा लोगों से जुड़ने के लिए बारामूला भी गए थे। हालांकि, वह सेनापति जिला नहीं जा सके, जिसकी उन्हें दिली तमन्ना थी। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में नेलांग और जादुंग जैसे दो गांवों को फिर से बसाने पर भी खुशी जाहिर की।
आधुनिक युद्ध का नया चेहरा ऑपरेशन सिंदूर
जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अतीत में लड़े गए सभी युद्धों से बिल्कुल अलग है। यह ऑपरेशन आज भी जारी है। इतिहास में पहली बार यह एक वास्तविक मल्टी-डोमेन ऑपरेशन था। इसका मतलब है कि सेना के तीनों अंगों ने एक साथ बेहद सटीक तालमेल के साथ काम किया। यह बड़े पैमाने पर 'नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर' यानी बिना आमने-सामने आए लड़ा जाने वाला युद्ध था।
स्पेस और साइबर तकनीक का अनूठा संगम
इस ऑपरेशन में अंतरिक्ष और साइबर जैसी आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया गया। जनरल चौहान ने बताया कि भले ही यह मुख्य सैन्य कार्रवाई केवल 88 घंटे चली, लेकिन इसके लिए बहुत बड़े स्तर पर समन्वय की जरूरत थी। इसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ-साथ सरकार के अन्य विभागों और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर काम किया। यह एक बेहद सुनियोजित ऑपरेशन था।
जीत के मायने बदले
सीडीएस ने कहा कि इस ऑपरेशन में जीत के पैमाने भी पूरी तरह अलग थे। उन्होंने तकनीक की ताकत को समझाते हुए कहा कि आप कल्पना कीजिए कि 300 या 400 किलोमीटर दूर से कोई चीज बिल्कुल सटीकता के साथ सीधे इस कमरे में आकर गिरे। हमारे भूगोल में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था। यही वजह है कि यह विशेष ऑपरेशन पहले की तुलना में पूरी तरह से अलग और ऐतिहासिक था।