सीसीएस की बैठक में नौसेना प्रमुख सुशील कुमार भी शामिल हुए।जब उनसे वायुसेना के इस्तेमाल को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसका समर्थन किया। वहां मौजूद वायुसेना अध्यक्ष अनिल यशवंत टिपनिस वायुसेना को कारगिल में उतारने के पक्ष में नहीं थे। उनका तर्क था कि ज्यादा ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर ले जाना जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।
चूंकि वे जानते थे कि जनरल मलिक मौजूदा परिस्थितियों में उनकी यह बात नहीं मानेंगे, इसलिए उन्होंने मलिक को एक पत्र भेजा। इसके टिपनिस ने बताया था कि हवाई मारक क्षमता केवल वायुसेना के हाथ में नहीं है। इस बाबत राजनीतिक एवं सामरिक बाध्यता के बारे में भी सोचना पड़ता है।अपने पत्र के अंत में टिपनिस ने लिख, एक बार दोबारा सोचें।
जनरल मलिक ने जवाब देने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, कारगिल व लद्दाख में लड़ रही सेना को वायुसेना का सहयोग जरूरी है।अगर आप सीसीएस के सामने भी इस प्रस्ताव को लेकर अपनी असहमति जताते हैं तो मैं आपका विरोध करूंगा।खास बात है कि इससे पहले वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ चंद्रशेखर, कारगिल की लड़ाई में वायुसेना की मदद की बात कह चुके थे।इसके बाद वायुसेना को कारगिल भेजने पर जब सहमति बनने लगी तो विदेश मंत्री जसवंत सिंह आगे आ गए।उन्हें समझाने में भी सेना को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
पीएम मोदी ने गत वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर की थी 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' की घोषणा ...
पीएम मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' के पद की व्यवस्था करने की घोषणा की थी।इससे तीनों सेनाएं युद्ध के समय बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकेंगी। सीडीएस की कमी कारगिल की लड़ाई में महसूस हुई थी। उस वक्त वायुसेना और थलसेना के बीच आपस में कई मसलों पर मतभेद सामने आया था। इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालसिस के सीनियर फैलो पी. स्टोबडन के अनुसार, खासतौर पर एशिया के देशों में सामारिक दृष्टि से परिस्थितियां बदल रही हैं।
ऐसे माहौल में जरूरी है कि सेना के तीनों अंगों में बेहतर तालमेल हो।लड़ाई जीतने के लिए तीनों सेनाओं की अलग-अलग रणनीति पर नहीं, बल्कि इस योजना पर काम किया जाए कि इन तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत से लड़ाई कैसे जीती जाए। ऐसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ का पद बहुत कारगर साबित होता है।1999 में कारगिल लड़ाई के बाद तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने की सिफारिश की थी। वाजपेयी सरकार में मंत्रियों के समूह की इस अहम सिफारिश पर सेना के तीनों अंगों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी।