करीब 10 साल पहले सेना ने अपनी डॉक्टरिन में कंप्यूटर सेंधमारों को काफी खतरनाक बताकर इससे सावधान रहने की सलाह दी थी। शुक्रवार को सेंधमारों का यह डर सेनाध्याक्ष जनरल बिपिन रावत के चेहरे पर साफ दिखा। वह जैसे ही दिल्ली कैंट में सीआईसीटी में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे, उनका पहला सवाल सेना की गोपनीय कंप्यूटर फाइलों की सुरक्षा को लेकर था। सूत्र बताते हैं कि सेनाध्यक्ष को जबतक विशेषज्ञों ने फुल प्रूफ सुरक्षा के बाबत आश्वस्त नहीं कर दिया, तबतक वह आखिरी जानकारी लेते रहे।
यह इसलिए भी मौजूं है कि शुक्रवार को ही रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर चीनी हैकरों ने सेंधमारी की थी। हालांकि सूत्र बताते हैं कि सेना के तीनों अंगों (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) में गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर की सतर्कता बरती जा रही है।
तीनों सेना मुख्यालयों के सूत्र बताते हैं कि 2007 से कंप्यूटर की गोपनीय फाइलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सेना ने इसके लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद से अभेद्य कार्ययोजना तैयार की है। एक मेजर जनरल स्तर के सूत्र का कहना है कि जबतक कोई सैन्य अफसर अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघेगा, हमारी गोपनीय फाइलों तक हैकर नहीं पहुंच सकते।
क्या कार्यक्रम था कल?
शुक्रवार को सेना के आर्मड डिवीजन ने आईटी क्षेत्र की जानी मानी कंपनी के विशेषज्ञों के सहयोग से एविएशन कोर में एसएपी सिस्टम को ऑपरेशनल बना दिया है। इसी को हरी झंडी दिखाने के लिए बिपिन रावत दिल्ली कैंट गए थे। इस सिस्टम पर सेना के गोला बारूद, सैन्य साजो-सामान, आयुध आदि का डेटा अपलोड हो चुका है। इसमें पुराने सामान, सेना के कबाड़ के सामान से लेकर आने वाले नए सैन्य साजो सामान है।
यहां तक कि सेना का मानव संसाधन विभाग, उपस्थिति आदि सभी को इस प्रणाली से जोड़ा गया है। इस सिस्टम के सेना के इंट्रा कंप्यूटर प्रणाली पर ऑनलाइन होने के बाद सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत से लेकर कोर कमांडर तथा फील्ड कमांडर अपनी सीट से ही प्रॉपर निगरानी रख सकते हैं।
ऐसा होने के बाद जहां पारदर्शिता की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी, वहीं सेना के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान का मूवमेंट, साजो-सामान की आवाजाही, मंजूरी लेने की प्रक्रिया में भी काफी समय की बचत होगी। युद्ध काल के दौरान सेना इस प्रणाली का काफी बेहतर तरीके से प्रयोग करेगी। खास बात यह है कि एसएपी ऑपरेशनल होने के बाद पूरे देश की सेना का यह कोर एक ऑनलाइन प्रणाली का हिस्सा बन गया है।