सीबीआई ने पी चिदंबरम को गिरफ्तार किया
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दोनों जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी का कहना है कि पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम से पूछताछ के दौरान कभी कोई सीधा जवाब नहीं मिला। जब भी कोई जांच अधिकारी (आईओ) उनसे सवाल करता या उनके आगे दस्तावेज रखकर उन्हें पहचाने और उनके बारे में कुछ बताने का आग्रह करता, तो चिदंबरम उसकी आंखों में आंखें डालकर मुस्कुराने लगते। कुछ क्षण तक मुस्कुराने के बाद फिर गोलमोल जवाब देकर अगला सवाल पूछने के लिए जांच अधिकारी की तरफ इशारा कर देते।
अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आईएनएक्स मीडिया केस में जांच एजेंसी का पक्ष रखते हुए चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी पर हुई बहस के दौरान कहा कि जांच अधिकारी की पूछताछ के दौरान तो चिदंबरम का जवाब होता, आई डॉन्ट नो, नो...नो...नो, आई हेव नेवर सीन दैम बिफॉर। उन्होंने हर सवाल का जवाब टालने के लहजे में दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में पी.चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने 24 पन्नों के फैसले में चिदंबरम को लेकर कई बातों का जिक्र किया है।
जांच में सहयोग नहीं
जांच एजेंसियों का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना था कि याचिकाकर्ता पी. चिदंबरम ने जांच में सहयोग नहीं किया। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ किए बिना यह केस अपने निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता। तुषार मेहता का कहना है कि केस की गंभीरता को देखते हुए पी. चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरुरत है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि चिदंबरम जांच अधिकारी के पूछे गए सभी सवालों का गोलमोल तरीके से जवाब दे रहे हैं और जांच में कोई सहयोग नहीं कर रहे।
दस्तावेज देख कर मुस्कराने लगे चिंदबरम
देश के वित्तमंत्री और गृहमंत्री रह चुके पी. चिदंबरम से एसएसपी, डीआईजी और ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी पूछताछ करते थे। जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि अगर उनसे ज्यादा पूछताछ करते तो वे चुप हो जाते थे। जब उनकी मर्जी होती थी, तभी बोलते थे। उनके सामने जब कोई दस्तावेज रखा जाता था, तो वे उसे पहचानने से इंकार कर देते। कुछ देर बाद जांच अधिकारी जब दोबारा से उनके सामने वही दस्तावेज रखता, तो वे मुस्कुराने लगते।
दूसरे आरोपियों जैसा सलूक
एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि चिदंबरम से पूछताछ को लेकर वही नियम लागू हो रहे हैं, जो दूसरे आरोपियों पर लागू होते हैं। उनसे पूछताछ होती है और लगातार प्रश्नों का दौर चलता है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट तरीके से किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनकी एक खासियत थी कि जब तक जांच अधिकारी खुद से उन्हें जाने के लिए नहीं कहता, तब तक वे उनके सामने ही बैठे रहते थे।