मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों से बड़े पैमाने पर जनता के हित में अपने कर्तव्यों का पालन करने की उम्मीद की जाती है क्योंकि किसी भी चूक के परिणामस्वरूप लोगों का उनसे विश्वास उठ जाएगा। न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने 28 अक्तूबर को सोकारपेट के एम गगन बोथरा की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें परिवहन विभाग के तत्कालीन सचिव आईएएस अधिकारी वी मोहनराज के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई थी।
गगन के मुताबिक अधिकारी ने 2016 में उनके पिता मुकुंचंद बोथरा से 10 लाख रुपये उधार लिए थे। बदले में मोहनराज ने एक चेक जारी किया, जो बाद में बाउंस हो गया। उन्होंने तत्कालीन मुख्य सचिव से मोहनराज के खिलाफ उचित कार्रवाई की शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान मुकुंचंद की मौत हो गई और उनके बेटे गगन ने मामले को आगे बढ़ाया। उन्होंने न्यायाधीश के समक्ष एक पक्षकार के रूप में मामले की पैरवी की। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायाधीश को सूचित किया कि 2016 की शिकायत पर इस साल 27 अक्तूबर को मामला दर्ज किया गया था और इसकी जांच की जा रही है।
न्यायाधीश ने गगन के तर्क में बल देखा और कहा कि कार्रवाई समय पर नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार में पदों पर आसीन अधिकारियों द्वारा की गई चूक जिम्मेदार है। सार्वजनिक प्राधिकरणों से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से और जनता के हित में करें।