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DefExpo 2018: वायु सेना के सबसे सफल फाइटर प्लेन 'सुखोई-30' को देखने भारत में उमड़ी दुनिया

Sat, 14 Apr 2018 07:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
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किसी भी देश की ताकत का अंदाजा उसकी सेना के दमखम से लगाया जा सकता है। आधुनिक हथियारों और कुशल रणनीति से ही युद्ध में सेना अपना परचम लहरा पाती है। ऐसें में बात अगर युद्ध की हो तो भारतीय वायु सेना को कौन भूल सकता है। भारतीय वायु सेना के फाइटर प्लेन्स ने कई नाजुक मौकों पर अहम रोल निभाया है। यही वजह है कि चेन्नई में चल रहे डिफेंस एक्सपो को देखने दुनिया भर के हथियार विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं। 

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ऐसे इन एक्सपर्ट्स की रुचि है भारतीय वायु सेना के सबसे सफल फाइटर प्लेन सुखोई-30 को देखने की।  यह फाइटर प्लेन भारतीय वायु सेना का सबसे सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है। तो आईये जानते हैं सुखोई एसयू-30 एमकेआई के बारे में–

परिचय

सुखोई एसयू-30 एमकेआई के डिजाइन का निर्माण रूस के सुखोई कॉरपोरेशन द्वारा किया गया।

रूस और भारत ने संयुक्त रुप से इस विमान को बनाने की योजना बनाई थी।

इसके बाद इसे बनाने की जिम्मेदारी भारत की हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी को दे दी गई, जहां काफी प्रयास और कड़ी मेहनत के बाद इसे बनाया गया।

एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान एसयू-27 और एसयू-37 फाइटर प्लेन का मिश्रण है।

एसयू-30 एमकेआई के विस्तार से पहले से यह दोनों लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हैं। 

‘दो इंजनों’ से मिलती है इसे रफ्तार

अपनी उड़ने की क्षमता, हवा और जमीन में तेजी से मिसाइलें दागने के कारण यह भारतीय वायु सेना का सबसे अहम लड़ाकू विमान बन चुका है। इस विमान को टाइटेनियम और उच्च तीव्रता वाले एल्यूमीनियम धातुओं से तैयार किया गया है। भारत की क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण इस लड़ाकू विमान की मदद से ही किया गया था। साल 2016 में भारतीय वायुसेना के नासिक एयरबेस पर ढाई टन वजनी ब्रह्मोस मिसाइल को इस लड़ाकू विमान में अटैच कर आसमान में परीक्षण के लिये भेजा गया था। 
 
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तकनीक 

एसयू-30 एमकेआई विमान की लंबाई 21.9 मीटर है और इसकी ऊंचाई 6.4 मीटर है।

इस लड़ाकू विमान के 14.7 मीटर लंबाई वाले पंख तेजी से हवा को भेदने में सक्षम है।

एसयू-30 एमकेआई का वजन 38,800 किलोग्राम है।

भारतीय वायु सेना के बेड़े में इससे पहले इतना वजनी लड़ाकू विमान कभी शामिल नहीं हुआ।
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