सुखोई एसयू-30 एमकेआई के डिजाइन का निर्माण रूस के सुखोई कॉरपोरेशन द्वारा किया गया।
रूस और भारत ने संयुक्त रुप से इस विमान को बनाने की योजना बनाई थी।
इसके बाद इसे बनाने की जिम्मेदारी भारत की हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी को दे दी गई, जहां काफी प्रयास और कड़ी मेहनत के बाद इसे बनाया गया।
एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान एसयू-27 और एसयू-37 फाइटर प्लेन का मिश्रण है।
एसयू-30 एमकेआई के विस्तार से पहले से यह दोनों लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हैं।
अपनी उड़ने की क्षमता, हवा और जमीन में तेजी से मिसाइलें दागने के कारण यह भारतीय वायु सेना का सबसे अहम लड़ाकू विमान बन चुका है। इस विमान को टाइटेनियम और उच्च तीव्रता वाले एल्यूमीनियम धातुओं से तैयार किया गया है। भारत की क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण इस लड़ाकू विमान की मदद से ही किया गया था। साल 2016 में भारतीय वायुसेना के नासिक एयरबेस पर ढाई टन वजनी ब्रह्मोस मिसाइल को इस लड़ाकू विमान में अटैच कर आसमान में परीक्षण के लिये भेजा गया था।
एसयू-30 एमकेआई विमान की लंबाई 21.9 मीटर है और इसकी ऊंचाई 6.4 मीटर है।
इस लड़ाकू विमान के 14.7 मीटर लंबाई वाले पंख तेजी से हवा को भेदने में सक्षम है।
एसयू-30 एमकेआई का वजन 38,800 किलोग्राम है।
भारतीय वायु सेना के बेड़े में इससे पहले इतना वजनी लड़ाकू विमान कभी शामिल नहीं हुआ।