चीता बिग कैट फैमिली का सबसे सुडौल, तेज रफ्तार जानवर है। तीन सेकंड में 100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल कर लेता है। यह दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट से दोगुना तेज है। यही नहीं अच्छी से अच्छी स्पोर्ट्स कार को यह रफ्तार हासिल करने में छह सेकंड लगते हैं। छोटा सिर, पतली कमर व गठीले शरीर के कारण इनकी फुर्ती देखते ही बनती है। देश में सत्तर साल बाद इनका पुनर्जन्म होगा, जब नमीबिया से आए आठ चीतों को मध्य प्रदेश में छोड़ा जाएगा।
123 प्रजातियों के पेड़ों के बीच 900 वर्ग किमी में दौड़ लगाएंगे
नामीबिया से आए आठ नन्हे चीते श्योपुर-मुरैना के 900 वर्ग किमी में फैले कूनो वन्यजीव अभयारण्य में 123 प्रजातियों के पेड़ों के बीच दौड़ लगाएंगे। 2018 में सरकार ने इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया था। इस पार्क में झाड़ियों की 71 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा बांस और घास की 34 प्रजातियां और बेलों और विदेशी वनस्पति की 32 प्रजातियां भी यहां मौजूद हैं।
चीतों को वापसी से दूर कर रहे पारिस्थितिकी तंत्र की विषमता : भूपेंद्र
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि भारत में चीता की वापसी पारिस्थितिकी तंत्र की विषमताओं को दूर करने की दिशा में मील का पत्थर है। 28वें ओजोन दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा, अंधाधुंध शिकार ने देश से चीता को विलुप्त कर दिया था। चीता के न रहने से ग्रासलैंड की इकोलॉजी खराब हुई है। इसके साथ ही चीता फूड चेन की भी अहम कड़ी है।