नियमों में बदलाव को लेकर इसलिए है जल्दी
इस सवाल पर कि इन बदलावों को लागू करने की इतनी जल्दी क्यों है, सचिव ने कहा कि यह एक आपात स्थिति है। अधिकारियों की संख्या कम होने से केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचा कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि इस संख्या में 2014 से अब तक अच्छी-खासी कमी आई है। मेरे पास केंद्र और राज्य दोनों स्थानों पर काम करने का अनुभव है और मैं समझता हूं कि इन बदलावों को लागू करने से मदद मिलेगी।
इससे पहले शुक्रवार को भी इन नियमों में बदलाव का बचाव करते हुए चंद्रा ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ काम करने से न केवल अधिकारियों का नजरिया बदलता है बल्कि अखिल भारतीय सेवा का उद्देश्य भी सिद्ध होता है। उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति हमेशा राज्यों में नहीं हो सकती है, क्योंकि यह न तो सेवा और न ही अधिकारियों के लिए ही अच्छा होगा।
राज्यों ने किया है प्रस्तावित संशोधनों का विरोध
कई राज्य केंद्र सरकार से नियमों में संशोधनों के प्रस्ताव को टालने की मांग कर चुके हैं। रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर यह मांग उठाई थी। उन्होंने कहा था कि ये संशोधन सहकारी संघवाद को कमजोर कर सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन संशोधनों का विरोध किया है।